ACB-EOW का बड़ा एक्शन: गरीबों के सिर से छिनी छत; 79 लाख रुपये के आवास घोटाले में कियोस्क संचालक गिरफ्तार

ACB-EOW का बड़ा एक्शन: गरीबों के सिर से छिनी छत; 79 लाख रुपये के आवास घोटाले में कियोस्क संचालक गिरफ्तार

रायपुर/कोरबा: छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। कोरबा जिले में गरीबों के लिए संचालित 'इंद्रा आवास योजना' की राशि में करोड़ों की हेरफेर करने वाले मुख्य आरोपी कियोस्क संचालक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

79 लाख रुपये का बड़ा गबन

आरोपी गौरव शुक्ला (47 वर्ष), जो बैंक ऑफ इंडिया की कोरबा शाखा में कियोस्क संचालक के रूप में कार्यरत था, पर आरोप है कि उसने योजना के लाभार्थियों के खातों से लगभग 79 लाख रुपये की राशि अवैध रूप से अपने और अपने परिवार के खातों में ट्रांसफर कर ली। यह राशि वर्ष 2010-11 में ग्रामीण हितग्राहियों को आवास निर्माण के लिए जारी की गई थी।

कैसे दिया घोटाले को अंजाम?

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने बेहद शातिराना तरीके से तकनीकी और प्रशासनिक खामियों का फायदा उठाया:

  • निष्क्रिय खातों को बनाया निशाना: आरोपी ने उन बैंक खातों को चुना जो लंबे समय से निष्क्रिय (Dormant) थे।

  • आईडी का दुरुपयोग: उसने बैंक कर्मचारियों की स्टाफ आईडी का उपयोग कर इन खातों को बिना किसी भौतिक सत्यापन के सक्रिय किया।

  • फर्जी आधार सीडिंग: आरोपी ने करीब 620 प्रविष्टियों में हेरफेर करते हुए हितग्राहियों के आधार नंबर हटाकर अपने और अपने परिजनों के आधार नंबर लिंक कर दिए।

  • डिजिटल चोरी: आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AEPS) के जरिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का उपयोग कर उसने राशि निकाली।

सॉफ्टवेयर की कमियों का उठाया लाभ

विवेचना के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने बैंक के Finacle सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियों, जैसे बिना आधार सत्यापन के ट्रांजेक्शन और ऑटो लॉगआउट फीचर के अभाव का पूरा लाभ उठाया। इससे वह लंबे समय तक इस धोखाधड़ी को अंजाम देने में सफल रहा।

कोर्ट ने भेजा पुलिस रिमांड पर

ईओडब्ल्यू ने अपराध क्रमांक 20/2018 के तहत कार्रवाई करते हुए गौरव शुक्ला को विशेष न्यायाधीश कोरबा की अदालत में पेश किया। अदालत ने आरोपी की गंभीरता को देखते हुए उसे 21 अप्रैल 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

अन्य अधिकारियों पर भी गिर सकती है गाज

इस मामले में केवल कियोस्क संचालक ही नहीं, बल्कि बैंक के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम अब इस बात की जांच कर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में फर्जी आधार सीडिंग और ट्रांजेक्शन बिना आंतरिक मिलीभगत के कैसे संभव हुए।