इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता विफल, परमाणु गारंटी पर अड़ा अमेरिका; जेडी वेंस खाली हाथ रवाना
इस्लामाबाद। पूरी दुनिया की उम्मीदों के विपरीत, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित अमेरिका और ईरान के बीच की उच्चस्तरीय वार्ता बेनतीजा समाप्त हो गई है। महीनों की तैयारी और लंबी चर्चाओं के बाद भी दोनों देश किसी साझा समझौते (Deal) पर पहुँचने में विफल रहे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस विफलता की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि परमाणु सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अमेरिका अपनी 'रेड लाइन्स' से पीछे नहीं हटेगा।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की 'गुड न्यूज-बैड न्यूज'
वार्ता की समाप्ति के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बड़े ही बेबाक अंदाज में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, "मेरे पास एक अच्छी खबर है और एक बुरी। अच्छी खबर यह है कि ईरान के साथ कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा हुई। लेकिन बुरी खबर यह है कि हम किसी ठोस समझौते तक नहीं पहुँच पाए।"
वेंस ने आगे कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह स्थिति अमेरिका से कहीं ज्यादा ईरान के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने खुलासा किया कि अमेरिका ने अपना "अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव" (Final and Best Offer) मेज पर रखा था, जिसे ईरान ने स्वीकार करने से फिलहाल इनकार कर दिया है।
परमाणु हथियारों पर फंसा पेंच
सूत्रों और आधिकारिक बयानों के अनुसार, बातचीत टूटने की मुख्य वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम रही। अमेरिका ने ईरान से इस बात की स्पष्ट और लिखित गारंटी मांगी थी कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
उपराष्ट्रपति वेंस ने जोर देकर कहा:
"परमाणु सुरक्षा पर रत्ती भर भी समझौता करना संभव नहीं है। हम उन तमाम रास्तों को बंद करना चाहते थे जिनसे ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु शक्ति बनने की क्षमता हासिल कर सके। हमारी 'रेड लाइन्स' इस मुद्दे पर बिल्कुल साफ हैं।"
ईरान ने 'अत्यधिक मांगों' को ठहराया जिम्मेदार
दूसरी ओर, ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी 'तसनीम' ने अपनी रिपोर्ट में वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका के अड़ियल रुख को जिम्मेदार बताया है। ईरान का दावा है कि अमेरिका ऐसी "अत्यधिक मांगें" (Excessive Demands) कर रहा था, जो ईरान की संप्रभुता और वैज्ञानिक प्रगति के खिलाफ थीं। इसी कारण किसी साझा फ्रेमवर्क पर सहमति नहीं बन पाई।
मेजबान पाकिस्तान की भूमिका की सराहना
हालांकि वार्ता सफल नहीं रही, लेकिन जेडी वेंस ने मेजबान देश पाकिस्तान के प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वार्ता के बेनतीजा रहने में पाकिस्तान की कोई गलती नहीं थी। पाकिस्तान ने दोनों देशों को करीब लाने के लिए शानदार कूटनीतिक प्रयास किए और एक बेहतरीन मेजबान की भूमिका निभाई।
वैश्विक राजनीति पर असर
जेडी वेंस अब बिना किसी समझौते के वाशिंगटन के लिए रवाना हो रहे हैं। इस वार्ता के विफल होने से अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच सकता है। परमाणु समझौते की उम्मीदें टूटने से अब वैश्विक बाजारों और कूटनीतिक गलियारों में ईरान के अगले कदम को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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