व्हाट्सएप पर मिलेगी रजिस्ट्री की कॉपी, किसानों को डिजिटल किसान किताब की सुविधा

व्हाट्सएप पर मिलेगी रजिस्ट्री की कॉपी, किसानों को डिजिटल किसान किताब की सुविधा

डिजिटल राजस्व सुधारों और सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा, केंद्र ने छत्तीसगढ़ मॉडल की सराहना की

रायपुर। भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेन्द्र भूषण ने आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील से सौजन्य भेंट कर राज्य में चल रहे डिजिटल राजस्व सुधारों और सिंचाई परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में ई-पंजीयन, भुईयां पोर्टल और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत किए जा रहे नवाचारों पर विस्तार से चर्चा हुई। केंद्र सरकार ने राज्य में हो रहे कार्यों पर संतोष व्यक्त किया।

बैठक में बताया गया कि डिजिटल व्यवस्थाओं के जरिए प्रदेश के किसानों और आम नागरिकों को राजस्व संबंधी कार्यों में अधिक पारदर्शिता और तेजी मिलेगी। अब रजिस्ट्री की प्रति व्हाट्सएप पर उपलब्ध कराने और डिजिटल किसान किताब जैसी सुविधाओं से लोगों को तहसील और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने जानकारी दी कि राज्य में भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण किया जा चुका है तथा आधुनिक रिकॉर्ड रूम स्थापित किए गए हैं। भुईयां पोर्टल के माध्यम से भूमि स्वामी अब अपनी डिजिटल किसान किताब कभी भी डाउनलोड कर सकते हैं।

वहीं, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग द्वारा रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस बना दिया गया है। अपॉइंटमेंट बुकिंग से लेकर दस्तावेज प्राप्ति तक की जानकारी अब व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे आम नागरिकों को बड़ी सुविधा मिल रही है।

बैठक में जलग्रहण प्रबंधन और सिंचाई परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (WDC 2.0) के अंतर्गत राज्य के 27 जिलों के 387 माइक्रो वाटरशेड क्षेत्रों में कार्य तेजी से जारी है। भारत सरकार ने इस महत्वपूर्ण परियोजना की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है तथा 30.14 करोड़ रुपये की अतिरिक्त किश्त भी जारी कर दी है। इससे प्रदेश के लगभग 2.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होने की उम्मीद है।