AI और डीपफेक पर दिल्ली हाई कोर्ट का प्रहार: गायक जुबिन नौटियाल के 'पर्सनैलिटी राइट्स' की सुरक्षा के लिए जारी किया ऐतिहासिक आदेश

AI और डीपफेक पर दिल्ली हाई कोर्ट का प्रहार: गायक जुबिन नौटियाल के 'पर्सनैलिटी राइट्स' की सुरक्षा के लिए जारी किया ऐतिहासिक आदेश

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग के बढ़ते दौर में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रसिद्ध पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके 'व्यक्तित्व अधिकारों' (Personality Rights) की रक्षा के लिए अंतरिम आदेश जारी किया है। इस फैसले के बाद अब कोई भी AI प्लेटफॉर्म या वेबसाइट जुबिन की अनुमति के बिना उनके नाम, आवाज या पहचान का इस्तेमाल नहीं कर पाएगी।

क्या है पूरा मामला?

गायक जुबिन नौटियाल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर शिकायत की थी कि कई वेबसाइट्स और एआई टूल्स उनकी आवाज की 'क्लोनिंग' कर रहे हैं। बिना अनुमति के उनकी गायन शैली (Singing Style) की नकल कर ऑडियो कंटेंट तैयार किया जा रहा है और कुछ ई-कॉमर्स साइट्स उनके नाम और फोटो वाले मर्चेंडाइज (जैसे स्टिकर, पोस्टर) बेचकर व्यावसायिक लाभ कमा रही हैं।

कोर्ट का कड़ा रुख: AI और डिजिटल अवतार पर रोक

जस्टिस तुषार राव गडेला की पीठ ने माना कि एक कलाकार की पहचान ही उसकी सबसे बड़ी संपत्ति है। कोर्ट ने आदेश दिया कि:

  • अनधिकृत उपयोग पर प्रतिबंध: कोई भी प्लेटफॉर्म जुबिन नौटियाल के नाम, आवाज, फोटो, सिग्नेचर या डिजिटल अवतार का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं करेगा।

  • AI और डीपफेक: यह आदेश विशेष रूप से एआई द्वारा तैयार नकली आवाजों, डीपफेक वीडियो और फेस-मॉर्फिंग जैसी तकनीकों पर लागू होगा।

  • कंटेंट हटाने के निर्देश: अदालत ने संबंधित टेक कंपनियों और प्लेटफॉर्मों को विवादित लिंक और आपत्तिजनक कंटेंट तुरंत हटाने या ब्लॉक करने का निर्देश दिया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यक्तित्व अधिकार (Personality Rights) बौद्धिक संपदा और निजता का हिस्सा हैं। यदि तत्काल रोक नहीं लगाई जाती, तो कलाकार की प्रतिष्ठा और आय को ऐसी अपूरणीय क्षति (Irreparable Harm) हो सकती है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

सेलेब्रिटीज के लिए बना नजीर

जुबिन नौटियाल से पहले अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर जैसे सितारे भी अपने 'पर्सनैलिटी राइट्स' की सुरक्षा के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं। जुबिन के मामले में आया यह आदेश भविष्य में अन्य कलाकारों को एआई के जरिए होने वाली पहचान की चोरी (Identity Theft) से बचाने के लिए एक मिसाल बनेगा।