सराफा व्यापार के लिए स्थिर नीतियां आवश्यक : तिलोकचंद बरड़िया
बजट 2026 के बाद सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव
रायपुर। केंद्रीय बजट 2026 के पश्चात सोने और चांदी की कीमतों में जो उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, उसका सीधा असर देश के ज्वेलरी एवं सराफा व्यापार पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितिययां, आयात लागत, डॉलर विनिमय दर और निवेश प्रवृत्तियाँ—इन सभी कारणों से सराफा बाजार फिलहाल संवेदनशील दौर से गुजर रहा है।
जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JITO), रायपुर, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष तिलोकचंद बरड़िया ने कहा कि भारत का ज्वेलरी सेक्टर करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है और इसमें स्थिरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। बजट 2026 में आर्थिक मजबूती की दिशा में सकारात्मक प्रयास किए गए हैं, लेकिन सराफा उद्योग के लिए दीर्घकालिक और स्थिर नीति ढांचे की आवश्यकता बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि कीमतों में बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव से खुदरा मांग प्रभावित होती है, जिससे छोटे और मध्यम ज्वेलर्स को स्टॉक मैनेजमेंट, कैश फ्लो और ग्राहक विश्वास जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। विवाह और त्योहारी सीजन के दृष्टिगत यह आवश्यक है कि बाजार में विश्वास का माहौल बने।
श्री बरड़िया ने सरकार से अपेक्षा जताई कि आयात शुल्क, टैक्स स्ट्रक्चर और अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल और व्यावहारिक बनाया जाए, ताकि ज्वेलरी एवं सराफा व्यापार को राहत मिल सके। इससे न केवल घरेलू कारोबार को मजबूती मिलेगी, बल्कि संगठित व्यापार को बढ़ावा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उन्होंने उपभोक्ताओं से भी अपील की कि वे सोने-चांदी की खरीदारी में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से प्रभावित न हों और केवल प्रमाणित, विश्वसनीय सराफा व्यापारियों से ही लेन-देन करें।
जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन ने विश्वास व्यक्त किया कि बजट 2026 के प्रभाव से आने वाले समय में सराफा बाजार में स्थिरता आएगी और ज्वेलरी उद्योग पुनः गति पकड़ेगा।

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