बोर्ड परीक्षा में आत्मविश्वास की अहम भूमिका : शिक्षक मोहन लाल वर्मा
रायपुर। अक्सर देखा जाता है कि बोर्ड परीक्षा के कुछ दिन पहले ही विद्यार्थियों का आत्मविश्वास डगमगाने लगता है, जो कि उचित नहीं है। इसका मुख्य कारण शिक्षकों, अभिभावकों और रिश्तेदारों द्वारा बनाया गया दबावपूर्ण माहौल होता है। अधिकतम अंक लाने की अपेक्षा बच्चों के मन में तनाव पैदा कर देती है, जिससे वे अच्छा करने की हड़बड़ी में घबरा जाते हैं।
विद्यार्थियों को केवल अंकों के आधार पर सफलता का मार्ग नहीं दिखाना चाहिए, बल्कि उन्हें समय के बेहतर प्रबंधन और संतुलित तैयारी का मार्गदर्शन देना अधिक आवश्यक है। केवल अंक ही किसी बच्चे के ज्ञान के स्तर को निर्धारित नहीं करते। वास्तविक ज्ञान का विकास तभी संभव है जब विद्यार्थी पाठ्यपुस्तकों का गहन अध्ययन करें। ये बातें शिक्षक मोहन लाल वर्मा ने कही।
उन्होंने कहा कि आजकल कई लोग केवल ब्लूप्रिंट या संभावित प्रश्नों पर ही ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते हैं, जिससे बच्चों का आत्मविश्वास कमजोर होता है। जबकि पुस्तकों का विस्तार से अध्ययन करने से विद्यार्थियों में आत्मबल बढ़ता है और वे किसी भी प्रकार के प्रश्नों का सामना करने में सक्षम बनते हैं।
यह भी ध्यान रखना चाहिए कि प्रत्येक विद्यार्थी की पढ़ने और समझने की क्षमता अलग-अलग होती है। परीक्षा के समय अत्यधिक सलाह या मार्गदर्शन देने से बच्चों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और वे अपने लक्ष्य से भटक सकते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को अपने पढ़ने के तरीके, खान-पान और दिनचर्या में अचानक बदलाव नहीं करना चाहिए, बल्कि सामान्य दिनचर्या के अनुसार ही तैयारी करनी चाहिए।
परीक्षा अवधि में सोशल मीडिया का अधिक या अनावश्यक उपयोग करने से बचना चाहिए। कई बार किसी एक विषय की परीक्षा अपेक्षा के अनुरूप न होने पर विद्यार्थी निराश हो जाते हैं, जो कि सही नहीं है। ऐसे समय में श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों को स्मरण करते हुए, बिना फल की चिंता किए, आगे की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। निश्चित रूप से सफलता अवश्य मिलेगी। कोई भी मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।
परीक्षा से एक-दो घंटे पहले अध्ययन को विराम दें और स्वयं को मानसिक रूप से शांत रखें। पूरे उत्साह और सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा कक्ष में प्रवेश करें। अपने बड़ों का आशीर्वाद लेकर पूर्ण आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ परीक्षा दें।
अंततः, एक अच्छा इंसान बनने के लिए अंकों से अधिक महत्व वास्तविक ज्ञान का होता है। यही ज्ञान भविष्य में बेहतर जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है। आप स्वयं अपने भाग्य के निर्माता हैं—इस विश्वास के साथ आगे बढ़ें। शिक्षक वर्मा ने सभी विद्यार्थियों को आगामी बोर्ड परीक्षाओं के लिए हार्दिक एवं शुभकामनाएं दीं।

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