दशकों से हिंसा का रास्ता अपनाने वाले अब मुख्यधारा में लौट रहे : विजय शर्मा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता मिल रही है। उन्होंने दोहराया कि 31 मार्च 2026 तक प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्त करने के संकल्प पर सरकार अडिग है।
राजधानी में रविवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए शर्मा ने बताया कि तेलंगाना में शीर्ष माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण ने नक्सली आंदोलन की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में चल रहा है, वहीं प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
देवजी और संग्राम ने डाले हथियार
शर्मा ने बताया कि तेलंगाना पुलिस के समक्ष जिन बड़े माओवादी नेताओं ने आत्मसमर्पण किया है, उनमें देवजी उर्फ तिप्पिरी तिरुपति शामिल है, जो पूर्व महासचिव बसवराजु के बाद संगठन का सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली चेहरा माना जाता था। वह महासचिव के रूप में सक्रिय था।
इसके अलावा मल्ला राजू रेड्डी उर्फ संग्राम, जो वर्षों से छत्तीसगढ़ के गढ़चिरौली और अबूझमाड़ (नारायणपुर) जैसे दुर्गम क्षेत्रों में सक्रिय रहा, उसने भी हथियार डाल दिए हैं।
89 बारूदी सुरंगें बरामद
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि करीगुट्टालु के दुर्गम इलाकों में चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान अब तक 89 बारूदी सुरंगें बरामद कर नष्ट की जा चुकी हैं। सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के बनाए गढ़ों को ध्वस्त किया है।
जनवरी 2024 से अब तक 532 नक्सली मारे गए हैं, जबकि 2,700 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। शर्मा ने कहा कि यह आंकड़े बताते हैं कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है।
31 मार्च 2026 तक ‘नक्सल मुक्त’ छत्तीसगढ़ का लक्ष्य
शर्मा ने कहा कि ‘डबल इंजन’ सरकार के समन्वय से निर्णायक कार्रवाई की जा रही है। शीर्ष नेतृत्व में अब गिने-चुने बुजुर्ग नक्सली ही बचे हैं, जिनकी सक्रियता भी नगण्य है।
उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।

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