उड़िया अस्मिता का उत्सव: लोक भवन में धूमधाम से मनाया जाएगा उत्कल दिवस

उड़िया अस्मिता का उत्सव: लोक भवन में धूमधाम से मनाया जाएगा उत्कल दिवस

लोक भवन में मनाया जाएगा उत्कल दिवस - पुरंदर मिश्रा

रायपुर। भारत में 1 अप्रैल 1936 को उड़िया प्रांत को पृथक राज्य के रूप में मान्यता मिली। इसके बाद आज के छत्तीसगढ़ का एक बड़ा भू-भाग उड़ीसा से अलग हुआ, जबकि उड़िया भाषी समाज के लोग यहीं बस गए। वर्तमान में पूरे छत्तीसगढ़ में उड़िया भाषी समाज का व्यापक निवास है, जिसकी जनसंख्या लगभग 35 लाख से अधिक है। रायपुर में उत्कल दिवस मनाने की परंपरा 90 के दशक से चली आ रही है और वर्ष 1994 में पहली बार 1 अप्रैल को यह दिवस मनाया गया था।

प्रदेश में उड़िया भाषी बहुल क्षेत्र

छत्तीसगढ़ के लगभग सभी जिलों में उत्कल समाज के लोग निवास करते हैं। इनमें प्रमुख रूप से रायपुर, रायगढ़, जगदलपुर, कांकेर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा, सारंगढ़, सरायपाली, बसना, पिथौरा, खल्लारी, महासमुंद, गरियाबंद, भिलाई, दुर्ग, जशपुर, कुनकुरी, लैलूंगा, तनाखार, पुसौर, सरिया, बरमकेला, सरगुजा, बिलासपुर, कोरबा सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं। इस समाज में विभिन्न आर्थिक वर्गों के साथ 18 से अधिक जाति-समुदाय के लोग सम्मिलित हैं।

इस बार उत्कल दिवस कैसे मनाया जाएगा

1 अप्रैल 2026 को उड़ीसा के स्थापना के 91वें वर्ष के रूप में उत्कल दिवस मनाया जाएगा। रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में यह आयोजन लोक भवन में भव्य रूप से संपन्न होगा। सर्व उड़िया समाज के प्रदेश अध्यक्ष पुरंदर मिश्रा तथा उत्कल सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. के.के. भोई के सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि होंगे तथा इसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे। इसके अलावा छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रीगण, नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत, सांसद, रायपुर शहर के विधायकगण, नगर निगम रायपुर की महापौर मिनल चौबे, पार्षदगण सहित छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के अनेक अतिथि उपस्थित रहेंगे।

इस अवसर पर सांस्कृतिक दलों द्वारा उड़िया गीत, भजन, ओडिसी नृत्य, संबलपुरी नृत्य सहित विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। साथ ही समाज के प्रतिभाशाली व्यक्तियों को राज्यपाल के हाथों सम्मानित किया जाएगा।