रांची के 8वीं के छात्र दिव्य प्रकाश का कमाल! NASA की सुरक्षा में ढूंढी खामी, मिला 'हॉल ऑफ फेम' का सम्मान
रांची: झारखंड की धरती प्रतिभाओं से भरी पड़ी है और इसका ताजा उदाहरण पेश किया है रांची के रहने वाले दिव्य प्रकाश ने। महज 13-14 साल की उम्र में जहाँ बच्चे खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, वहीं दिव्य प्रकाश ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA (National Aeronautics and Space Administration) की वेबसाइट में एक बड़ी तकनीकी खामी (Vulnerability) खोज निकाली है। उनकी इस मेधा को स्वीकार करते हुए नासा ने उन्हें प्रतिष्ठित 'हॉल ऑफ फेम' अवॉर्ड से नवाजा है।
कौन हैं दिव्य प्रकाश?
दिव्य प्रकाश रांची के एक निजी स्कूल में 8वीं कक्षा के छात्र हैं। बचपन से ही उनकी रुचि कंप्यूटर कोडिंग और साइबर सुरक्षा (Cyber Security) में रही है। उन्होंने बिना किसी प्रोफेशनल कोचिंग के, इंटरनेट और अपनी मेहनत के दम पर 'एथिकल हैकिंग' (Ethical Hacking) के गुर सीखे हैं।
कैसे मिली यह बड़ी कामयाबी?
दिव्य ने नासा के सर्वर और डेटाबेस की जांच के दौरान एक ऐसी सुरक्षा चूक पकड़ी, जिसके जरिए कोई भी हैकर एजेंसी के गोपनीय डेटा तक पहुँच सकता था।
-
जिम्मेदारी का परिचय: दिव्य ने इस खामी का फायदा उठाने के बजाय एक 'एथिकल हैकर' की तरह इसकी पूरी जानकारी नासा की सुरक्षा टीम को ईमेल के जरिए भेजी।
-
नासा का जवाब: नासा के तकनीकी विशेषज्ञों ने जब दिव्य द्वारा बताई गई खामी की जांच की, तो उसे सही पाया। एजेंसी ने तुरंत उस सुरक्षा चूक को ठीक किया और दिव्य की ईमानदारी व टैलेंट की सराहना करते हुए उन्हें प्रशंसा पत्र और 'हॉल ऑफ फेम' का सर्टिफिकेट भेजा।
क्या होता है 'हॉल ऑफ फेम'?
बड़ी तकनीकी कंपनियां और एजेंसियां (जैसे Google, Facebook, NASA) उन लोगों को 'हॉल ऑफ फेम' की सूची में शामिल करती हैं जो उनकी वेबसाइट या सॉफ्टवेयर में ऐसी खामियां ढूंढते हैं जो सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकती हैं। यह साइबर सुरक्षा की दुनिया में एक बहुत बड़ा सम्मान माना जाता है।
भविष्य के लक्ष्य
दिव्य प्रकाश की इस सफलता से उनके परिवार और पूरे झारखंड में खुशी की लहर है। दिव्य का कहना है कि वह भविष्य में एक बड़ा साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ (Cyber Security Expert) बनना चाहते हैं और भारत की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने में अपना योगदान देना चाहते हैं।

admin 




