मोदी सरकार का बड़ा फैसला! पेट्रोल-डीजल पर ₹10 कम की गई एक्साइज ड्यूटी
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मडल ईस्ट) में जारी युद्ध और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देने का प्रयास किया है। वित्त मंत्रालय ने 26 मार्च 2026 की देर रात एक अधिसूचना जारी कर पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में ₹10 प्रति लीटर की भारी कटौती कर दी है।
एक्साइज ड्यूटी में हुए बदलाव के मुख्य बिंदु:
सरकार ने विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) में जो कटौती की है, वह इस प्रकार है:
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पेट्रोल: ड्यूटी ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी गई है।
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डीजल: ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर से घटाकर शून्य (Zero) कर दी गई है।
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प्रभावी तिथि: ये संशोधित दरें तत्काल प्रभाव (27 मार्च 2026) से लागू हो गई हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला?
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कच्चे तेल का संकट: अमेरिका-इजरायल-इरान संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें $122 प्रति बैरल तक पहुँच गई थीं।
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तेल कंपनियों का घाटा: अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने रिटेल दाम नहीं बढ़ाए थे, जिससे उन्हें प्रति लीटर ₹24 से ₹30 का भारी नुकसान हो रहा था।
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महंगाई पर लगाम: सरकार का उद्देश्य ईंधन की कीमतों में होने वाली संभावित भारी वृद्धि को रोकना है, ताकि माल ढुलाई महंगी न हो और खाने-पीने की चीजों के दाम स्थिर रहें।
क्या पेट्रोल पंप पर दाम कम होंगे? (Fact Check)
यह समझना जरूरी है कि इस कटौती का सीधा मतलब पंप पर कीमतों का घटना नहीं है:
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कीमतें स्थिर रहेंगी: इस ₹10 की कटौती का उपयोग तेल कंपनियां अपने मौजूदा घाटे को कम करने के लिए करेंगी। यानी, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बावजूद आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे नहीं, बल्कि फिलहाल स्थिर रहेंगे।
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निजी कंपनियों का हाल: नायरा एनर्जी (Nayara Energy) जैसी निजी कंपनियों ने हाल ही में दाम बढ़ाए थे, लेकिन सरकारी पंपों पर दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 पर ही स्थिर बना हुआ है।
निर्यात पर लगा 'विंडफाल टैक्स'
घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं:
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डीजल एक्सपोर्ट: निर्यात पर ₹21.5 प्रति लीटर का टैक्स लगाया गया है।
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ATF (विमान ईंधन): निर्यात पर ₹29.5 प्रति लीटर की ड्यूटी लगाई गई है।
इसका उद्देश्य रिलायंस जैसी निजी रिफाइनरियों को विदेशों में तेल बेचने के बजाय घरेलू बाजार में आपूर्ति करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

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