ईरान में युद्ध की आहट के बीच 10 हजार भारतीयों की सुरक्षा दांव पर; एयरस्पेस बंद होने से उड़ानें बाधित

ईरान में युद्ध की आहट के बीच 10 हजार भारतीयों की सुरक्षा दांव पर; एयरस्पेस बंद होने से उड़ानें बाधित

नई दिल्ली। ईरान में शासन विरोधी हिंसक प्रदर्शनों और बढ़ते तनाव ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। करीब दो हफ्तों से जारी इस उथल-पुथल के कारण ईरान की आंतरिक स्थिति बेहद अस्थिर हो गई है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, हिंसक झड़पों में अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ अपुष्ट रिपोर्ट यह आंकड़ा 3,000 के पार बता रही हैं। इस संकट का सीधा असर अब भारतीय नागरिकों, विमानन सेवाओं और द्विपक्षीय व्यापार पर पड़ने लगा है।

1. भारतीयों की सुरक्षा और कश्मीरी छात्रों का संकट

ईरान में वर्तमान में लगभग 10,000 से 12,000 भारतीय मूल के लोग मौजूद हैं। इनमें सबसे बड़ी चिंता मेडिकल की पढ़ाई कर रहे लगभग 2,000 से 3,000 कश्मीरी छात्रों को लेकर है।

  • संपर्क का अभाव: ईरान में बार-बार इंटरनेट शटडाउन और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के कारण छात्र अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।

  • निकासी की मांग: जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) और छात्रों के अभिभावकों ने भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और सुरक्षित निकासी योजना की अपील की है। भारतीय दूतावास ने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है, लेकिन अब तक कोई बड़ी 'इवैक्युएशन' (निकासी) योजना घोषित नहीं हुई है।

2. एयरस्पेस बंद: फ्लाइट्स पर पड़ा असर

बुधवार को ईरान ने अपना एयरस्पेस (वायु क्षेत्र) अचानक बंद कर दिया, जिससे भारत और यूरोप/उत्तरी अमेरिका के बीच की अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुईं।

  • रूट डायवर्जन: एयर इंडिया और इंडिगो जैसी प्रमुख विमान कंपनियों ने अपनी उड़ानों को डायवर्ट (दूसरे रास्ते से भेजना) कर दिया है।

  • एडवाइजरी: यात्रियों को देरी और उड़ानें रद्द होने की स्थिति के प्रति आगाह करने के लिए ट्रेवल एडवाइजरी जारी की गई है।

3. रणनीतिक और व्यापारिक चोट: चाबहार और बासमती एक्सपोर्ट

ईरान में अस्थिरता भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए बड़ा झटका है:

  • चाबहार पोर्ट परियोजना: भारत ने चाबहार बंदरगाह में करीब 500 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जो पाकिस्तान को बाईपास कर मध्य एशिया तक पहुँचने का गेटवे है। वर्तमान अशांति इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के भविष्य को खतरे में डाल रही है।

  • व्यापार में गिरावट: कभी 17.6 बिलियन डॉलर (2019) का रहने वाला भारत-ईरान व्यापार अब घटकर महज़ 2.3 बिलियन डॉलर (2024) रह गया है।

  • बासमती चावल: ईरान भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा बाजार रहा है, लेकिन निर्यात में भारी गिरावट देखी गई है। 2018-19 में 3.51 बिलियन डॉलर का निर्यात अब सिमटकर 1.24 बिलियन डॉलर रह गया है।

4. भू-राजनीतिक संतुलन पर असर

ईरान में बढ़ता तनाव भारत की 'वेस्ट एशिया पॉलिसी' के लिए बड़ी चुनौती है। चाबहार बंदरगाह, जो चीनी समर्थित ग्वादर बंदरगाह से महज़ 92 समुद्री मील दूर है, भारत की रणनीतिक उपस्थिति का प्रतीक है। यदि ईरान में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है, तो इस क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान के प्रभाव में वृद्धि हो सकती है, जो भारत की 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' (रणनीतिक स्वायत्तता) को कमजोर कर सकता है।