छत्तीसगढ़ में हजार लडक़ों पर 974 लड़कियां : लिंगानुपात में छत्तीसगढ़ देश में नंबर-वन

छत्तीसगढ़ में हजार लडक़ों पर 974 लड़कियां : लिंगानुपात में छत्तीसगढ़ देश में नंबर-वन
केरल और हिमाचल को भी पछाड़ा
रायपुर (चैनल इंडिया)। प्रदेश बेटियों की मुस्कान के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी-सेक्स रेशियो एट बर्थ) के मामले में 974 (प्रति 1000 पुरुष) के प्रभावशाली आंकड़े के साथ प्रदेश देशभर में अव्वल है। राष्ट्रीय औसत 929 से कहीं आगे यह उपलब्धि बताती है कि राज्य में अब बेटी का जन्म बोझ नहीं बल्कि उत्सव माना जाने लगा है।
जहां कभी समाज में बेटे-बेटी के बीच फर्क साफ दिखाई देता था, वहीं आज प्रदेश बेटियों की मुस्कान में देशभर में अव्वल है। गर्भाधान पूर्व व प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के सख्त क्रियान्वयन ने कन्या भ्रूण हत्या पर प्रभावी रोक लगाई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित जांच, पंजीयन और निगरानी से कानून केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीन पर असर दिखा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम, लिंग आधारित भेदभाव के उन्मूलन और किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं। राज्य के सभी जिलों में निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ करने, नियमित समीक्षा और अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर अनिवार्य सूचना प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि 974 का लिंगानुपात इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश में बेटियों के सम्मान और संरक्षण को लेकर सामूहिक प्रयास सफल हो रहे हैं। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों, जिला प्रशासन, महिला समूहों और जनप्रतिनिधियों की मेहनत का नतीजा है। आज प्रदेश की पहचान सिर्फ संसाधनों या योजनाओं से नहीं, बल्कि उस संवेदनशील सोच से बन रही है, जिसमें हर बेटी को समान अधिकार, बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य का हक मिल रहा है।