रामानंद सागर की 'रामायण': कैसे बिना तकनीक के साकार हुए पुष्पक विमान और जटायु? जानें शूटिंग के वो अनसुने किस्से
नई दिल्ली : 80 के दशक में प्रसारित हुई रामानंद सागर की 'रामायण' आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में बसी है। उस दौर में जब आज जैसा आधुनिक वीएफएक्स (VFX) और कंप्यूटर ग्राफिक्स नहीं थे, तब भी रामायण के दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। पुष्पक विमान की उड़ान हो या जटायु का रावण से युद्ध, इन दृश्यों को तैयार करना उस समय के कलाकारों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।
हाल ही में सामने आए कुछ दिलचस्प तथ्यों के अनुसार, रामायण के उन जादुई दृश्यों के पीछे का 'साधारण विज्ञान' वाकई हैरान करने वाला है।
पुष्पक विमान का 'जुगाड़'
रामायण में जब भगवान राम या रावण को पुष्पक विमान में उड़ते हुए दिखाया जाता था, तो दर्शक हैरान रह जाते थे। लेकिन इसके पीछे कोई हाई-टेक तकनीक नहीं, बल्कि 'क्रोमा की' (Chroma Key) और 'मॉडलिंग' का इस्तेमाल होता था।
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शूटिंग का तरीका: विमान का एक छोटा मॉडल बनाया गया था। जिसे धागों या क्रेन की मदद से एक नीले पर्दे (Blue Screen) के सामने उड़ाया जाता था। बाद में एडिटिंग के दौरान बैकग्राउंड बदलकर उसे आकाश जैसा रूप दिया गया।
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साधना और धैर्य: अभिनेताओं को घंटों तक क्रेन पर लटकना पड़ता था ताकि वे उड़ने का अनुभव पर्दे पर वास्तविक दिखा सकें।
जटायु का युद्ध और वह 'मैकेनिकल बर्ड'
जटायु का रावण से युद्ध रामायण के सबसे भावुक दृश्यों में से एक है।
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कठपुतली तकनीक: जटायु को साकार करने के लिए एक बड़ी मैकेनिकल कठपुतली (Puppet) बनाई गई थी। इसे कई लोगों की मदद से भीतर से ऑपरेट किया जाता था।
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अभिनय: कलाकार (अमरीश पुरी जैसे दिग्गज भी उस दौर की कई पौराणिक फिल्मों में ऐसी तकनीक देखते थे) और तकनीशियनों के बीच गजब का तालमेल था। जटायु के पंखों के फड़फड़ाने से लेकर उनकी आंखों की हलचल तक, सब कुछ मानवीय हाथों से संचालित किया गया था।
तकनीक से बढ़कर 'श्रद्धा' का जादू
रामानंद सागर की टीम का मानना था कि उनके पास संसाधनों की कमी थी, लेकिन 'दृढ़ संकल्प' की कोई सीमा नहीं थी।
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सेट का कमाल: पुष्पक विमान या लंका के दृश्य बनाने के लिए थर्मोकोल, कार्डबोर्ड और पेंट का बहुत चतुराई से उपयोग किया गया था।
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लाइव इफेक्ट्स: आज के 'ग्रीन स्क्रीन' के दौर में जहां सब कुछ कंप्यूटर पर होता है, रामायण की टीम 'लाइव सेट' पर विश्वास करती थी, जिससे अभिनेताओं को अभिनय करने में अधिक सहजता महसूस होती थी।
क्यों आज भी खास है ये रामायण?
आज की पीढ़ी के लिए यह सोचना मुश्किल है कि बिना इंटरनेट और बिना कंप्यूटर के कैसे रामायण जैसे महाकाव्य को पर्दे पर उतारा गया। इसका जवाब है - रचनात्मकता (Creativity)। हर एक शॉट को परफेक्ट बनाने के लिए दर्जनों बार रिहर्सल की जाती थी। यही कारण है कि आज भी जब हम उन दृश्यों को देखते हैं, तो तकनीक की कमी कहीं भी खलती नहीं है, बल्कि उस समय की मेहनत साफ झलकती है।

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