देश में रायपुर की नई पहचान : वर्चुअल नेट मीटरिंग शुरू,60 किलोवाट सोलर सिस्टम से मिली 20 परिवारों को बिजली बिल में बड़ी राहत

देश में रायपुर की नई पहचान :  वर्चुअल नेट मीटरिंग शुरू,60 किलोवाट सोलर सिस्टम से मिली 20 परिवारों को बिजली बिल में बड़ी राहत

पार्थिवी पैसिफिक सोसायटी में लगाया गया 60 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम 

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देशभर में नई पहचान बना ली है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत रायपुर की पार्थिवी पैसिफिक रिहायशी सोसायटी में वर्चुअल नेट मीटरिंग (VNM) की शुरुआत की गई है। यह सिस्टम अपनाने वाला रायपुर देश का पहला शहर बन गया है। इस पहल से सोसायटी में रहने वाले 20 परिवारों को सीधे तौर पर बिजली बिल में बड़ी राहत मिलने लगी है।


पार्थिवी पैसिफिक सोसायटी में 60 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम लगाया गया है। इसके जरिए अपार्टमेंट में रहने वाले सभी 20 फ्लैटों को एक ही सोलर प्लांट से बिजली का लाभ मिल रहा है। खास बात यह है कि यह व्यवस्था उन लोगों के लिए बेहद कारगर साबित हो रही है, जिनके पास अपने-अपने फ्लैट की छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती।


सालाना 6.30 लाख की बचत

सोलर सिस्टम चालू होने के बाद सोसायटी के बिजली बिल में इसका असर साफ दिखने लगा है। अनुमान है कि पूरे प्रोजेक्ट से सालाना करीब 6 लाख 30 हजार रुपए की बचत होगी। यानी प्रत्येक परिवार को साल में लगभग 31,500 रुपए तक बिजली बिल में राहत मिलेगी। हर परिवार को औसतन 300 यूनिट तक बिजली का क्रेडिट मिलने लगा है, जिससे मासिक खर्च में अच्छी-खासी कमी आई है।


कैपेक्स मॉडल पर लगाया गया सोलर प्लांट

यह सोलर प्रोजेक्ट कैपेक्स मॉडल पर लगाया गया है। यानी 20 परिवारों ने मिलकर सोलर प्लांट में निवेश किया है और यह पूरी तरह उनकी संपत्ति है। पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 24 लाख रुपए आई है। प्रत्येक परिवार ने लगभग 1.20 लाख रुपए का निवेश किया, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपए की सब्सिडी मिली है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 30 हजार रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी भी दी जा रही है, जिससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ और कम हो गया है।

सरकार ने बताया मिसाल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पहल को छत्तीसगढ़ में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ और हरित भारत के विजन से जुड़कर राज्य के लोग अब तेजी से सौर ऊर्जा को अपना रहे हैं।

ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव के अनुसार, वर्चुअल नेट मीटरिंग शहरी उपभोक्ताओं के लिए गेम चेंजर साबित होगी। इससे सामूहिक रूप से सोलर ऊर्जा का लाभ मिलेगा, बिजली बिल घटेगा और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।


क्या है वर्चुअल नेट मीटरिंग

वर्चुअल नेट मीटरिंग के तहत अपार्टमेंट या सोसायटी में एक बड़ा सोलर प्लांट लगाया जाता है। इससे पैदा होने वाली बिजली पहले ग्रिड में जाती है। इसके बाद हर फ्लैट की तय हिस्सेदारी के अनुसार बिजली का क्रेडिट उनके बिल में जुड़ जाता है। इससे सभी फ्लैट एक ही सोलर सिस्टम का लाभ ले पाते हैं, भले ही उनके पास अलग-अलग छत न हो। रायपुर में शुरू हुआ यह मॉडल अब प्रदेश के अन्य शहरों के लिए भी उदाहरण बनता जा रहा है।