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अनोखी शादी : ‘आम’ बना दूल्हा, दुल्हन बनी ‘जामुन’, ग्रामीण बने बराती-घराती,जानिए क्या है पूरा मामला

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इंसानों की शादी तो आम बात है, लेकिन जब बात पेड़ों की शादी की हो तो हैरानी होना स्वाभाविक है, लेकिन ऐसा हुआ है कासगंज जिले की तहसील पटियाली के गांव बीनपुर में। यहां एक पर्यावरण प्रेमी ने दो पेड़ों की शादी कराई है। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए रविवार सुबह को आम और जामुन के पेड़ों को वैवाहिक बंधन में बांधा गया। खास बात यह कि दोनों पेड़ों के विवाह की रस्में हिंदू रीति रिवाज के अनुसार हुई हैं। ग्रामीण बराती और घराती बने।

आम और जामुन के पेड़ों की शादी गांव बीनपुर निवासी ओमप्रकाश द्विवेदी ने कराई है। वेद विद्वान पंडित अनिल कुमार मिश्रा ने हिंदू रीति रिवाजों के अनुसार मंत्रोच्चारण करते हुए पेड़ों के विवाह की रस्मों को पूरा कराया। इस अनूठी शादी को देखने के लिए क्षेत्रभर से तमाम लोग उमड़े। जिसको भी इसकी जानकारी मिली, वह इस शादी का साक्षी बनने के लिए उत्सुक दिखाई दिया।
ओमप्रकाश द्विवेदी बताते हैं कि 10 वर्ष पूर्व उन्होंने अपनी सौ बीघा जमीन में आम का एक बाग लगाया था। बाग लगाते समय यह संकल्प लिया था कि जब बाग में खूब फल फूल आने लगेंगे तो पेड़ों का विवाह कराएंगे। यह भी संकल्प लिया था कि जिन पेड़ों की शादी कराएंगे उन पेड़ों को मान पक्ष को दान करेंगे। इसी संकल्प को पूरा करते हुए उन्होंने ररविवार को शुभ मुहूर्त में आम और जामुन के पेड़ों की शादी कराई।

बहन, बहनोई को दान किए दोनों पेड़
विधि विधानपूर्वक विवाह संपन्न होने के बाद आयोजक ने ब्राह्मण को दान दक्षिणा दी और शादी पूर्ण होने पर आम और जामुन के पेड़ को दान कर दिया। ओमप्रकाश द्विवेदी ने अपनी बहन संतोष कुमारी और बहनोई विजय शंकर को दोनों पेड़ दान किए हैं।

सहभोज भी कराया
जिस तरह इंसानों की शादी में भोज की परंपरा है। उस परंपरा को पेड़ों की शादी में भी निभाया गया। आयोजक ने शादी में पहुंचे रिश्तेदारों और ग्रामीणों को शादी संपन्न होने के बाद भोजन भी कराया। क्षेत्र में यह शादी चर्चा का विषय बनी हुई है।

यह है शादी की परंपरा
पर्यावरण विशेषज्ञ दिवाकर वशिष्ठ कहते हैं कि पेड़ों की शादी की परंपरा सबसे अधिक राजस्थान में है। क्योंकि वहां पेड़ों की संख्या कम है, इसलिए वहां के पर्यावरण प्रेमी काफी लंबे समय से विधि विधानपूर्वक पेड़ों की शादी कराते हैं और शादी के बाद यह संकल्प लेते हैं कि उनका कटान नहीं होने देंगे। यह पेड़ समाज को समर्पित हैं। राजस्थान में पेड़ों की शादी के साथ साथ तालाबों की प्राण प्रतिष्ठा की भी परंपरा है। कासगंज में यह अनूठा प्रयास पर्यावरण संरक्षण को बेहतर संदेश दे रहा है।

इसलिए लिया यह निर्णय
पेड़ों की शादी कराने वाले ओम प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि मैंने देखा है कि तेजी से पेड़ों का कटान हो रहा है, लेकिन लोगों का पौधरोपण की ओर ध्यान नहीं है। जिससे पर्यावरण को खतरा हो रहा है और मुझे यह भी जानकारी हुई थी कि पेड़ों की शादी कुछ जगह लोग कराते रहे हैं। इसलिए जनमानस को पौधरोपण और पर्यावरण का संदेश देने के लिए यह आयोजन कराया है।

 


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