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ये है प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्रों की असलियतः दवाओं की मांग दोगुनी, लेकिन किल्लत से दूर हो रहे मरीज

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रायपुर राजधानी समेत प्रदेश में आधे प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र बंद होने के बाद भी पिछले एक साल में यहां जेनेरिक दवाओं की मांग दोगुना हो गई है। लेकिन दवाओं की किल्लत की वजह से मरीज इससे दूर जा रहे हैं। रही सही कसर प्रशासन पूरा कर दे रहा है। मानिटरिंग की व्यवस्था ही नहीं है।

राजधानी में 17 समेत प्रदेश में 129 प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र संचालित हैं। वर्ष 2020-21 में इन जनऔषधि केंद्रों में दवाओं का महीने का कारोबार 50 लाख रुपये तक था। वर्ष 2021-22 में जनऔषधि केंद्रों में महीने का दवाओं का कारोबार एक करोड़ रुपये से पार पहुंच गया है। केंद्र संचालकों का कहना है कि दवाओं की सही आपूर्ति हो तो महीने का कारोबार पांच करोड़ रुपये से अधिक जा सकता है, लेकिन दवाओं की किल्लत है।

रायपुर के एक जनऔषधि केंद्र में दवा खरीदने के लिए पहुंचे सागर शर्मा, विश्वजीत, उर्मिला देवांगन का कहना है प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्रों में 90 प्रतिशत तक छूट होने की वजह से यहां दवा खरीदने आते हैं। लेकिन सामान्य दवाएं ही उपलब्ध हो पाती हैं, गंभीर बीमारियों की दवाएं यहां नहीं मिलतीं। चिकित्सक द्वारा लिखी पर्ची की कुछ दवाएं ही मिल पाती हैं। मजबूरी में अन्य दुकान से दवा लेनी पड़ती है।

शासन से नहीं मिल रही मदद

प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना के राज्य समन्वयक अनिश वोडितेलवार ने बताया कि केंद्रों में जेनेरिक दवाओं की मांग बढ़ी है। किल्लत न हो, लगातार यह प्रयास रहता है। शासन स्तर पर हमें किसी तरह की मदद नहीं मिल रही है। यदि मदद मिले तो इनका बेहतर विस्तार किया जा सकता है।

जेनेरिक दवा को जानें

जेनेरिक वह दवा है, जो बिना किसी पेटेंट के बनाई और वितरित की जाती है। जेनेरिक दवा के फार्मुलेशन पर पेटेंट हो सकता है, लेकिन उसके सक्रिय घटक पर पेटेंट नहीं होता। जेनेरिक दवाइयां गुणवत्ता में ब्रांडेड दवाओं से कम नहीं होतीं। ये उतनी ही असरकारक हैं, जितनी ब्रांडेड दवाइयां। यह दवाएं 50 से 90 प्रतिशत छूट पर मिलती हैं।

प्रधानमंत्री जनकल्याणकारी योजना के राष्ट्रीय महासचिव सच्चिदानंद उपासने ने कहा, प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्रों की प्रदेश सरकार अनदेखी कर रही है। इन्होंने राज्य स्तर पर जिन जनऔषधि केंद्रों का संचालन शुरू किया है, वहां प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्रों की तुलना में अधिक कीमत में दवाएं मिल रही हैं। जहां प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र खुलते हैं, वहां प्रशासन द्वारा बोर्ड हटवा दिया जाता है। संचालन में अड़ंगा लगाया जा रहा है। इसका खामियाजा राज्य की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

राज्य में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र पर एक नजर

249 प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र स्वीकृत

120 केंद्र हो चुके हैं बंद

129 केंद्रों का हो रहा संचालन

78 सरकारी और 51 निजी क्षेत्रों में संचालित

90 प्रतिशत तक छूट पर मिलती हैं दवाएं

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