बच्चों व युवाओं को हार्ट की बीमारियो का शिकार होने से बचा सकते हैं ये टिप्स… – Channelindia News
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बच्चों व युवाओं को हार्ट की बीमारियो का शिकार होने से बचा सकते हैं ये टिप्स…

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नई दिल्ली. ज्यादा वसा, नमक और चीनी वाले डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों पर पैकेट के सामने की ओर चेतावनी को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए. को इस चेतावनी व्यवस्था के लिए राजी करने के लिए आम लोगों, अभिभावकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और डॉक्टरों को एक साथ आगे आना चाहिए. भारत में युवाओं को हृदय रोगों का बढ़ता खतरा टाला जा सकता है, अगर कम उम्र से ही खाने-पीने की चीजों में शामिल अवयवों के बारे में जागरुकता लाई जाए. के मौके पर जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित गोयल ने यह बात कही. फोर्टिस अस्पताल, गुरुग्रामके हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गोयल ने कहा क‍ि इस तरह का अस्वस्थ्यकर आहार पूरे शरीर को, खासकर हृदय को भारी नुकसान पहुंचा रहा है. ‘अनहेल्दी पैकेज्ड फूड से अपने हृदय को बचाओ’ विषय पर इंस्टीट्यूट फॉर गवर्नेंस, पॉलिसीज एंड पॉलिटिक्स (आईजीपीपी) द्वारा आयोजित वेबिनार में डॉ. गोयल ने कहा की बिना देखे-परखे अनहेल्दी फूड का अनियंत्रित सेवन और भागदौड़ वाली मौजूदा जीवन-शैली दिल पर कहर ढा रही है. इस वजह से 40 वर्ष से कम उम्र के युवा भी हृदय रोग की चपेट में आ रहे हैं और उनकी मौत हो रही है.
उन्होंने बताया की धमनियों के संकुचित होनेकी वजह से दिल की बीमारी होती है। ज्यादा वसा, नमक या चीनी वाले खाद्य पदार्थों की वजह से हृदय तक खून पहुंचाने वाली धमनियों के अंदर की दीवारों पर वसा की मोटी परत जमने लगती है जिससे वह संकुचित होने लगता है. इस वजह से हृदय तक पहुंचने वाले खून की आपूर्ति बाधित होने लगती है और दिल की बीमारी का रूप ले लेती है. कम उम्र से इस तरह के अनहेल्दी फूड का सेवन करने से धमनियों का संकुचन भी तभी से शुरू हो सकता है. मध्य उम्र में पहुंचने तक यह काफी उन्नत हो सकता है. इसलिए दिल की खातिर बच्चों को भी पता होना चाहिए कि वे क्या खा रहे हैं.

बच्चों और युवाओं के दिल को बचाने के लिए FOPL चेतावनियां समय की जरूरत
उन्हों ने कहा की बच्चों और युवाओं के दिल को बचाने के लिए एफओपीएल चेतावनियां समय की जरूरत हैं. इन्हें तत्काल खाद्य उद्योग के लिए अनिवार्य बनाया जाना चाहिए ताकि उपभोक्ताओं को डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ खरीदते समय इसकी जानकारी मिल सके और वे स्वस्थ विकल्प को चुन सकें. अपने तर्क की पुष्टि के लिए उन्होंने तंबाकू उत्पादों पर अनिवार्य सचित्र चेतावनी का हवाला दिया, जिससे उपभोक्ताओं को तंबाकू के इस्तेमाल से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक होने में मदद मिली है और उनकी धारणा बदली है.

चिली देश ने 2012 में FOPL की चेतावनी लेबल प्रणाली को अपनाया

डॉ. गोयल ने कहा इसी तरहएफओपीएल गैर-संचारी रोगों के बोझ को कम करने में मदद कर सकता है. भारत में गैर-संचारी रोग खतरनाक रूप से बढ़ रहा है. दक्षिण अमेरिकी देश चिली का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा की चिली ने वर्ष 2012 में एफओपीएल की चेतावनी लेबल प्रणाली को अपनाया था. स्वस्थ खाना खाने के प्रति लोगों को प्रोत्साहित कर अनहेल्दी अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और पेय पदार्थों की खपत को कम करने में चिली सफल रहा है. इसका फायदा उसे एक और रूप में मिल रहा है. वहां गैर-संचारी रोगों की दर भी पहले की तुलना में घट रही है.

वरिष्ठ पत्रकार गौरव एस करीर के एक सवाल के जवाब में डॉ. गोयल ने बताया कि इस मॉडल को ब्राजील, फ्रांस और इजराइल जैसे देशों ने भी अपनाया है. जबकि कई अन्य देश इस मॉडल को अपनाने की प्रक्रिया में हैं ताकि उनकी आबादी भी गैर-संचारी रोगों के जाल से मुक्त हो सके.

एफओपीएल को लेकर कई सालों से असमंजस में है भारत
दूसरी ओर, भारत पिछले कई वर्षों से एफओपीएल को लेकर ऊहापोह में है. यहां इसे अभी तक अनिवार्य नहीं किया गया है. इस वजह से भारत तेजी से मोटापा, दौरा पड़ना और दिल की बीमारियों जैसे कई गैर-संचारी रोगों का घर बनता जा रहा है. डॉ. गोयल ने चेतावनी देते हुए कहा क‍ि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो भारत वर्ष 2045 तक बच्चों के मोटापे और मधुमेह की राजधानी बन सकता है. ये दोनों मूक हत्यारे हैं और स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ के साथ-साथ आर्थिक तौर पर भी नुकसान पहुंचाते हैं.
भारत के करीब 14.4 लाख बच्चे मोटापे से पीड़ित
भारत के कम से कम 14.4 लाख बच्चे मोटापे से पीड़ित हैं. विभिन्न अध्ययनों में बताया गया है कि ज्यादा वसा, नमक और चीनी (एचएफएसएस) वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से मोटापा, मधुमेह और हृदय संबंधी बीमारियों में 10 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है. वहीं कुछ प्रकार के कैंसर में भी 10 प्रतिशत वृद्धि होने की संभावना जताई गई है.

उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों में एचएफएसएस के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत स्कूली स्तर पर ही की जाना चाहिए ताकि वयस्क होने तक वे एचएफएसएस के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले खतरों के बारे में जान सकें और उस बारे में उचित निर्णय ले सकें. उन्होंने कहा क‍ि इसका दीर्घकालिक प्रभाव होगा.

 

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