कचरे से कमाई कराने वाली नई स्कीम की शुरूआत, लोन पर मिलेगी बड़ी छूट, जानिए इसके बारे में सबकुछ… – Channelindia News
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कचरे से कमाई कराने वाली नई स्कीम की शुरूआत, लोन पर मिलेगी बड़ी छूट, जानिए इसके बारे में सबकुछ…

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नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने जीईएफ-एमएनआरई-यूएनआईडीओ के साथ मिलकर, कर्ज पर ब्याज सब्सिडी स्कीम लॉन्च की है. स्कीम के तहत औद्योगिक जैविक कचरे को इनोवेटिव ऊर्जा बायोमेथेनेशन प्रोजेक्ट और बिजनेस मॉडल पेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. इस मौके पर जैविक कचरे के लिए जीआईएस आधारित इनवेंट्री टूल को भी पेश किया गया.
बायोगैस यह एक है जो विभिन्न जैविक सब्सट्रेट्स से बनती है. इसे कृषि अवशेषों जैसे मध्यवर्ती फसलों, खाद, भूसे इत्यादि से भी बनाया जाता है. यह सीवेज कीचड़ और अन्य जैविक कचरे में भी बनता है, घरेलू और औद्योगिक दोनों.
इन लैंडफिल्स में कचरे को दफनाने के लिए विभिन्न परतों को रखने का प्रयास किया जाता है और कचरे के अपघटन में उत्पन्न होने वाली हवा को फिर से इकट्ठा करने के लिए पाइप का निर्माण किया जाता है. इस गैस को बायोगैस कहा जाता है.
बायोगैस की उत्पत्ति को अच्छी तरह से जानने के लिए देखें कि बायोमीथेन कहां से आता है. एनारोबिक पाचन के परिणाम से बायोगैस उत्पादन होता है. इसका मतलब है, ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में.
कई बैक्टीरिया होते हैं जो कार्बनिक पदार्थों को क्षीण करके कार्य करते हैं और ऐसा करने के लिए उन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है. इस प्रक्रिया से पहली अनुपचारित ऊर्जावान गैस निकलती है.

क्या है नई स्कीम
संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूएनआईडीओ) और भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने ग्लोबल इनवॉयरमेंट फेसेलिटी (जीईएफ) द्वारा कर्ज पर ब्याज सबवेंशन योजना शुरू की है.
स्कीम के तहत औद्योगिक जैविक कचरे को इनोवेटिव ऊर्जा बायोमेथेनेशन प्रोजेक्ट और बिजनेस मॉडल पेश करने के लिए छूट के साथ कर्ज दिया जाएगा.
औद्योगिक जैविक कचरे को ऊर्जा बॉयोमेथेनेशन प्रोजेक्ट में परिवर्तित करने के लिए आम तौर पर ज्यादा पूंजी की जरूरत होती है.
इसके अलावा इन प्रोजेक्ट की ऑपरेशन लागत भी ज्यादा होती है. साथ ही कचरे की उपलब्धता, रेवन्यू भी एक चुनौती होती है.
इसके अलाव प्रोजेक्ट के जरिए निकलने वाली बॉयोगैस और उसकी उपयोगिता भी काफी संवेदनशील होती है. ऐसी परियोजनाओं में इन्नोवेशन के जरिए न केवल ऊर्जा की उत्पादकता में सुधार हो सकता है बल्कि उसके जरिए ऊर्जा उत्पादन की लागत कम से कम हो सकती है. यह लोन स्कीम, लाभार्थियों को ऐसी परियोजनाओं के सामने आने वाले कर्ज पर ब्याज के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है.

लॉन्च हुआ नया टूल
वेबिनार के दौरान जीईएफ-एमएनआरई-यूएनआईडीओ परियोजना के तहत विकसित जैविक कचरे के लिए जीआईएस आधारित इनवेंट्री टूल को भी पेश किया गया. यह उपकरण पूरे भारत में उपलब्ध शहरी और औद्योगिक जैविक कचरे और उनकी ऊर्जा उत्पादन क्षमता के जिला स्तर का आकलन प्रदान करेगा. जीआईएस उपकरण एसएमई और परियोजना डेवलपर्स को अपशिष्ट ऊर्जा परियोजनाओं को स्थापित करने में सक्षम करेगा और देश में अपशिष्ट से ऊर्जा क्षेत्र में बायोमेथेनेशन के तेजी से विकास की सुविधा प्रदान कर सकता है.

 


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