पंचायती राज के जनक थे राजीव गांधी। राष्ट्रीय पंचायत दिवस पर पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे ने दी बधाई। - Channelindia News
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पंचायती राज के जनक थे राजीव गांधी। राष्ट्रीय पंचायत दिवस पर पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे ने दी बधाई।

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रायपुर | धरसींवा जनपद पंचायत के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे एवम जिला पंचायत रायपुर की पूर्व सदस्य श्रीमती संतोषी बंजारे ने छत्तीसगढ़ प्रदेश वासियो को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस हर साल 24 अप्रैल को मनाया जाता है. देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में पंचायती राज व्यवस्था का पूरा प्रस्ताव तैयार कराया. ये दिन भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के पारित होने का प्रतीक है, जो 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ था. आपको बता दें, देश में पंचायती राज पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी लेकर आए थे।

, 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज की मजबूत नींव देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी ने रखी थी, उस पर अधिकारों की एक शानदार इमारत खड़ी करने का काम राजीव गांधी जी ने किया था.

पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे ने आगे कहा कि पंचायती राज से जुड़ी संस्थाएं मजबूती से विकास कार्य कर सकें, इस सोच के साथ राजीव गांधी ने देश में पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त किया. राजीव गांधी का मानना था कि जब तक पंचायती राज व्यवस्था सफल नहीं होगी, तब तक निचले स्तर तक लोकतंत्र नहीं पहुंच सकता.
राजीव ने हिन्‍दुस्‍तान के गांवों को विकास में हिस्सेदार बनाने के लिए 73वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायती राज व्यवस्था लागू की। यह राजीव के सपनों के भारत की बुनियाद थी।

– राजीव ने पंचायती राज के जरिए एक साथ दो काम कर दिया। गांवों को अपने विकास का अधिकार और महिलाओं को एक तिहाई हिस्सेदारी।

– राजीव ने गांव-गांव को टेलीफोन से जोड़ने और कंप्यूटर के जरिए महीनों का काम मिनटों में करने की बात की। राजीव गांधी का सपना था कि गांव-गांव में टेलीफोन पहुंचे और कंप्‍यूटर शिक्षा का प्रचार हो।जानें, 24 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है पंचायती राज दिवस
पंचायती राज में गांव के स्तर पर ग्राम सभा, ब्लॉक स्तर पर जनपद पंचायत और जिला स्तर पर जिला पंचायत होता है। इन संस्थानों के लिए सदस्यों का चुनाव होता है जो जमीनी स्तर पर शासन की बागडोर संभालते है

सिर्फ केंद्र या राज्य सरकार ही पूरे देश को चलाने में सक्षम नहीं हो सकती है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर भी प्रशासन की व्यवस्थ की गई है। इसी व्यवस्था को पंचायती राज का नाम दिया गया है। पंचायती राज में गांव के स्तर पर ग्राम सभा, ब्लॉक स्तर पर जनपद पंचायतऔर जिला स्तर पर जिला पंचायत होता है। इन संस्थानों के लिए सदस्यों का चुनाव होता है जो जमीनी स्तर पर शासन की बागडोर संभालते हैं।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीमती संतोषी बंजारे ने कहा कि पंचायती राज की भूमिका
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे कि अगर देश के गांवों को खतरा पैदा हुआ तो भारत को खतरा पैदा हो जाएगा। उन्होंने मजबूत और सशक्त गांवों का सपना देखा था जो भारत के रीढ़ की हड्डी होती। उन्होंने ग्राम स्वराज का कॉन्सेप्ट दिया था। उन्होंने कहा था कि पंचायतों के पास सभी अधिकार होने चाहिए। गांधीजी के सपने को पूरा करने के लिए 1992 में संविधान में 73वां संशोधन किया गया और पंचायती राज संस्थान का कॉन्सेप्ट पेश किया गया। इस कानून की मदद से स्थानीय निकायों को ज्यादा से ज्यादा शक्तियां दी गईं। उनको आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की शक्ति और जिम्मेदारियां दी गईं।
पंचायती राज कैसे चलता है?
शुरुआती दिनों में एक सरपंच गांव का सर्वाधिक सम्मानित व्यक्ति होता था। हर कोई उसकी बात सुनता था। यानी गांव के स्तर पर सरपंच में ही सारी शक्तियां होती थीं। लेकिन अब ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तरों पर चुनाव होता है और प्रतिनिधियों को चुना जाता है। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं के लिए पंचायत में आरक्षण होता है। पंचायती राज संस्थानों को कई तरह की शक्तियां दी गई हैं ताकि वे सक्षम तरीके से काम कर सकें।

पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे ने कहा कि राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस
24 अप्रैल, 1993 को संविधान में 73वां संशोधन किया गया। तब से उस दिन को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के तौर पर मनाया जाता है

महात्मा गांधी ने क्या कहा था?

पंचायत भारतीय समाज की बुनियादी व्यवस्थाओं में से एक रहा है. महात्मा गांधी ने भी पंचायतों और ग्राम गणराज्यों की वकालत की थी. उन्होंने कहा था कि गांव की पंचायत के पास अधिकार होने चाहिए. गांधी के सपने को पूरा करने के उद्देश्य से ही 1992 में संविधान में 73वां संशोधन किया गया और पंचायती राज संस्थान का कॉन्सेप्ट पेश किया गया. बता दें, स्वतंत्रता के बाद से, समय-समय पर भारत में पंचायतों के कई प्रावधान किए गए और 1992 के 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के साथ इसको अंतिम रूप दे दिया गया था.

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