वन अफसरों के संरक्षण में वनों को चट कर रहे हैं राजस्थानी ऊंट, भेड़ , बकरी – Channelindia News
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वन अफसरों के संरक्षण में वनों को चट कर रहे हैं राजस्थानी ऊंट, भेड़ , बकरी

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कवर्धा,( चैनल इंडिया ) कबीरधाम जिला के कवर्धा विधानसभा से प्रदेश के वनमंत्री मोहम्मद अकबर विधायक है और उन्ही के निर्वाचन क्षेत्र के वन सुरक्षित नही है तो प्रदेश की क्या स्थिति होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता हैं। वनमण्डल के बोड़ला, पंडरिया और सहसपुर लोहारा विकासखंड के वन परिक्षेत्र में इन दिनों बड़ी संख्या में राजस्थानी , गुजराती , भेड़ ,बकरी , ऊंट देखे जा सकते है। पहाड़ व वनों की ऊंचाई अधिक होने के कारण यह ऊंट बड़े पेड़ों की हरियाली चट कर रहे है। और भेड़ बकरी वृक्षारोपण व छोटे पेड़ों की हरियाली। इन ऊंटों और भेड़ों का झुड़ जहां से निकला जाता है वहां पेड़ों में ठूंठ और जमीन पर बिना पत्तों की डंगाल नजर आती है। बावजूद इसके बावजूद इसके वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी इसे रोकने में के लिए कोई सार्थक कदम नहीं उठा रहे है। जंगलों में वनस्पतियां बड़ी तेजी से नष्ट होती जा रही है। जिस स्थान से इन ऊंटों और भेड़ों का झुंड़ गुजरता है वहां हरियाली दिखाई नहीं देती है।

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बीते कुछ सालों से राजस्थान और गुजराज से आने वाले ऊंट और भेड़ वालों यहां जमे हुए है। बोड़ला, लोहारा, पंडरिया, कोदवागोडान , घानी खुटा , बन्दौरा , बोककरखार , तरेगॉव ,देवसरा अंचलों में भेड़ वालों के चलते वनों और वनस्पतियों को काफी नुकसान हो रहा है। वनवासी अंचलों में जहां तहां उनके डेरे दिखाई देने लगे है। एक-एक डेरे में हजारों की संख्या में भेड़ें व बकरिया रहती है। वनवासियों के अनुसार जिन स्थानों पर इनके डेरे ठहरते हैं और भेड़ें व बकरियां बैठती है वहां घास तक नहीं जमती। दूसरी ओर भेड़ों को खिलाने के लिए उनके चरवाहे जंगल के झाड़ों को काट देते हैं इससे जंगलों में कर्रा, धवड़ा, साजा व अन्य पेड़ जैसे झाड़ों के ठूंठ दिखाई देने लगे हैं।

वनवासी अंचलों से कई महत्वपूर्ण वनस्पतियां इन भेड़ों व ऊंटों के कारण विलुप्त होने के कगार पर है। कुछ साल पहले चरौहा नामक झाड़ियों की भरमार रहती थी जो अब समाप्ति की ओर है। वनवासी रामसिंह , गंगाराम , धनीराम , रामकुमार का कहना है कि अगर ऊंट भेड़ वालों पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो आने वाले कुछ वर्षों में वन और वनस्पतियां नष्ट हो जाएगी।

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मुख्यालय में नही रहते अधिकारी

वन विभाग के रेंजर डिप्टी रेंजर व वनरक्षक मुख्यालय में निवास नही करते जिसके चलते अंचल के लोगों को कभी भी इन अधिकारियों की सक्रियता जंगलों की सुरक्षा के लिए दिखाई नहीं देती। इसी का फायदा उठाते हुए चरवाहों ने वनांचल में अपना डेरा जमाना प्रारंभ कर दिया है। वनांचलवासी जब इसका विरोध करते हैं तो उनके द्वारा भी धौंस जमाते हुए विवाद करने पर उतारू हो जाते हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि कहीं ना कहीं वन विभाग के कर्मियों का इन्हें संरक्षण प्राप्त है। इसके कारण बेखौफ होकर जंगलों में घुसकर पेड़ पौधों को चारागाह बनाकर नष्ट कर रहे हैं।

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दो विभागों का लाभ राजस्थानियों को

राजस्थानी, गुजराती भेड़ ,बकरी ,उट वालो को दो विभाग वन विभाग व वनविकास निगम का संरक्षण प्राप्त होता है यदि ग्रामीणों के द्वारा अधिकारी से शिकायत करते हैं तो वन विभाग के अधिकारी वनविकास निगम का क्षेत्र में आता हैं और वनविकास निगम वनविभाग का क्षेत्र आता हैं करके अपना पल्ला झाड़ लेते हैं जिसका लाभ भेड़ बकरी चरवाहों को मिलता है ।

सबको पहुचता है हिस्सा

राजस्थानी भेड़ बकरी चरवाहों का कहना है कि हमे तो कई वर्षों से जंगल मे गुजरा करना पड़ रहा है जबतक अधिकारियों को पैसा नही देंगे हमे परेशान करते हैं इसलिए वनविकास ,वनविभाग के फ़रवाचर , वनरक्षक ,रेंजर व वनमण्डल अधिकारी को भी सबको पैसा देते हैं ।

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