हमारा देश और -हमारी जवाबदारी : केके पाठक - Channelindia News
Connect with us

channel india

हमारा देश और -हमारी जवाबदारी : केके पाठक

Published

on

साहित्यिक विशेष 

के के पाठक, रायपुर द्वारा लिखित  

135 करोड़ की आबादी वाले इस देश में  लगभग 27 प्रतिशत लोग गरीबों के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं, हमारे देश में शिक्षा का प्रतिशत भी चिंतनीय है, और शिक्षा की व्यवस्था भी चिंतनीय है, हमारे देश के ऊपर वर्तमान में लगभग विश्व बैंक का 08 से 09 बिलियन डालर का कर्जा है, भारतीय करेंसी में आप अंदाजा लगा सकते हैं व कैलकुलेट कर सकते हैं एक डॉलर हमारे देश के 77 रुपए के बराबर है। अब आप समझ सकते हैं, कि हमारे देश के ऊपर विश्व बैंक का कितना कर्जा है। हमारा देश आज अपनी संस्कृति और सभ्यता धीरे धीरे पूरी तरह खोते जा रहा है, स्वतंत्रता के पहले बची खुची भारतीय संस्कृति को देश की आजादी के बाद, विदेशी संस्कृति में झोक दिया गया, हमें अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने और अंग्रेजी में काम करने का भूत सवार है, हमें मन से अंग्रेज और तन से भारतीय बनाया गया, जिसका असर धीरे-धीरे यह हुआ कि आज हम मन और तन दोनों से अंग्रेज हो गए हैं। हम अपने आप को अंग्रेजी जानकर जेंटलमैन समझते हैं, जबकि हमें जेंटलमैन की परिभाषा भी नहीं मालूम है, सिर्फ परिधान पहन लेने से कोई जैंटलमैन नहीं बन जाता, मैंने अंग्रेजी माध्यम की फर्स्ट क्लास की बुक में, ए बी सी डी को पढ़ा, तो उसमें मुझे कहीं भी भारतीय संस्कृति की झलक दिखाई नहीं दी सारी झलक और संस्कृति विदेशी सभ्यता से भरी पड़ी थी, अचम्भव तो तब हुआ जब मैं जेड पर पहुंचा, जिसके आगे लिखा हुआ था, जेट फ़ार जेंटलमैन और सामने एक कोट टाई और सूट पहने व्यक्ति का चित्र दिया हुआ था, मेरे मन में विचार आया कि यह कैसी शिक्षा है, जो किसी बालक के मन में एक गलतफहमी को भर रही है जेंटलमैन यानी की सभ्य पुरुष और चित्र में दिया गया है  कि वह कोट पेंट, टाई ,और सूट पहना हुआ है, तो मेरे दिमाग में आया कि क्या एक भारतीय जो धोती और कुर्ता पहना हुआ हो, वह जेंटलमैन सभ्य पुरुष नहीं हो सकता क्या। यह तो है विदेशी संस्कृति,जबकि जेट के आगे जेंटलमैन लिखकर उसका विस्तृत विवरण देना चाहिए था, क्या परिधान पहनने से व्यक्ति सभ्य पुरुष और असभ्य पुरुष बन सकता है । आज हमारे देश के करीब 1500 बिलियन डालर  स्विस बैंक में जमा है जिसमें काला धन अधिकतर है, अब आप स्वयं अंदाज लगा सकते हैं की एक डॉलर की कीमत भारतीय मुद्रा में 77 रूपया के लगभग है । हमारे देश का वार्षिक बजट वर्ष 2019- 20 का 417 बिलियन डॉलर लगभग था। हमारे देश में संवैधानिक दृष्टि से एक ऐसा नियम बनना चाहिए कि हमारे देश का कोई भी व्यक्ति या नागरिक विदेश के किसी भी बैंक में अपनी राशि जमा ना कर सके और अगर जमा करता है तो उसे इस राशि की आवक का पूरा विवरण कि यह राशि कहां से आई कैसे प्राप्त की गई इसकी आवक का क्या स्रोत है, देकर भारत सरकार से इस बात की स्वीकृति लेनी होगी, तभी वह अपनी राशि किसी भी विदेशी बैंक या स्विस बैंक में जमा कर सके। और यह सब करने में सक्षम हमारे देश के जनप्रतिनिधि हैं जनता ने उनको अगर चुना है तो वे देशहित के ऐसे कामों को संसद में उठाएं  और बिना किसी भेदभाव के एकमत होकर ऐसी बातों पर देश हित की बातों पर अपना समर्थन दें, ताकि हमारा देश आर्थिक रूप से सक्षम बन सके, और हमारे यहां लूट खसोट कमीशन खोरी, कालाबाजारी जैसी गैर संवैधानिक प्रक्रियाओं पर रोक लग सके, हमारे देश में व्यक्तियों को उनके आर्थिक आधार पर सुख सुविधाएं देने का प्रावधान हो ऐसा नियम बनाया जाए कि यदि किसी व्यक्ति की वार्षिक आय पांच लाख से कम है तो उसे सरकारी सुख-सुविधाओं का लाभ मिले, जातिगत जहर को देश की स्वतंत्रता के 70 वर्षों के बाद अब तो पूर्णता से समाप्त कर देना चाहिए। जाति और सरनेम लोगों के व्यक्तिगत विषय हो अगर हमें अपने संविधान पर विश्वास है, तो संविधान में स्पष्ट लिखा है की जनता का जनता पर जनता द्वारा शासन। इस देश की जनता के साथ जातिगत व्यक्तिगत कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। सबको एक नागरिक की हैसियत से जाना जाएगा। तभी हमारे देश में सुधार आने की संभावना है। साथ ही हमारे देश के महापुरुषों के सपने भी साकार होंगे, जैसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, और बाबा भीमराव अंबेडकर जो कि सदैव जाति विहीन समाज की परिकल्पना किया करते थे, हमें अपने देश की जनता को जैसा कि आए दिनों समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों में सुनाई देता है, कि वे व्यक्तियों को और उनके समूहों को जातिगत नाम से पुकारते हैं जैसे हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई इस पर कानून द्वारा कढ़ाई से रोक लगाने की जरूरत है, और उसकी जगह यह कहा जाए कि देश के आमुख कानून का 50 नागरिकों ने उल्लंघन किया, हम सब सबसे पहले अपने देश के नागरिक हैं। इसके बाद कुछ और हमारा पहला कर्तव्य हमारा प्रथम  धर्म हमारे देश के लिए है हमे कानून कायदों का पालन करना है, हमारे देश के हित के लिए कार्य करना है , ना की अपने जातिगत धर्मगत  मजहब और पंथ के भेदभाव को व्यक्त करना है यह निश्चित है कि यदि हम समाचार पत्रों में, न्यूज़ चैनलों में लोगों को भारतीय नागरिक के नाम से पुकारेगे तो निश्चित ही जातिगत, भेदभाव धीरे धीरे स्वतह समाप्त हो जावेगा ,और लोगों के मन में अपने देश भारत के प्रति श्रद्धा सद्भावना और सेवा भाव जागृत होगा।

 

 

RO No.- 11641/7

Advertisment

Advertisement

Advertisment

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

CG Trending News

खबरे छत्तीसगढ़7 hours ago

नक्सलियों से बेखौफ: ये महिला बखूबी निभा रही सरपंच की जिम्मेदारी

रायपुर। धुर नक्सली क्षेत्र की एक सामान्य सी दिखने वाली महिला रीता मंडावी के हौसल को लोग सलाम कर रहे...

खबरे छत्तीसगढ़7 hours ago

भूपेश बघेल ने बीजापुर विधानसभा क्षेत्र में की भेंट मुलाकात, कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज बीजापुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम आवापल्ली में भेंट-मुलाकात के दौरान आम जनता और जनप्रतिनिधियों...

खबरे छत्तीसगढ़10 hours ago

कुएं में मिली पत्थरों से बंधी लाश : दो दिन से लापता था युवक, हत्या का अंदेशा

पलारी। बलौदाबाजार जिले के पलारी थाना क्षेत्र के गांव सकरी (प) के कुएं में एक 22 वर्षीय युवक की लाश...

खबरे छत्तीसगढ़10 hours ago

गबनबाज सचिव निलंबित : हड़प लिया था दिव्यांग हितग्राही के 5 माह की पेंशन राशि

बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में दिव्यांग हितग्राही के पेंशन राशि का गबन करने के मामले में सचिव पर गाज...

Special News10 hours ago

50 लाख की लूट: पीड़ित कारोबारी बोले – चिल्लाने पर भी मदद के लिए नहीं आया कोई

रायपुर। माना थाना क्षेत्र के डूमरताई में सोमवार को 50 लाख रुपये की लूट की घटना के बाद पहली बार...

Advertisement