मंत्री ही नहीं चाहते कि बस्तर में शान्ति कायम हो : संदीप सलाम – Channelindia News
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मंत्री ही नहीं चाहते कि बस्तर में शान्ति कायम हो : संदीप सलाम

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बीजापुर(चैनल इंडिया)|  सर्व आदिवासी समाज के प्रान्तीय संयुक्त सचिव संदीप सलाम द्वारा जारी प्रेस नोट में बताया गया कि सुकमा जिले के सिलगेर जनसंहार की सर्व आदिवासी  समाज बस्तर सम्भाग की जांच दल की रीपोर्ट  राज्यपाल को ई-मेल से सौपा गया उसके बाद अनुसूचित क्षेत्र की संरक्षिका राज्यपाल ने प्रदेश सरकार को अनुसूचित क्षेत्र में शान्ति स्थापना के लिए आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया है इस पर राज्य सरकार के कृषि मंत्री का घोर अपमान जनक बयान सामने आया है। इस बयान का सर्व आदिवासी समाज छ ग घोर आक्रोश के साथ निंदा करती है ।  जनजातीय मामलों पर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल के विशेषाधिकार निर्देश पर कटाक्ष कर रहे मंत्री रविंद्र चौबे का बयान विधि सम्मत नहीं है, विधि के विरुद्ध है राज्यपाल महोदया का निर्देश में यह अन्तर्निहित है कि छ ग जनजाति सलाहकार परिषद के अध्यक्ष व सदस्यों को संवैधानिक परिषद की तत्काल बैठक बुलाकर राज्यपाल के निर्देश अनुसार प्रस्ताव पारित कर राज्यपाल कार्यालय को सलाह करने की बात निहित हैं सर्व आदिवासी समाज की भी यही मांग  है कि सिलगेर मामले को लेकर छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद को तत्काल बैठक आयोजित कर इस विषय में गहन चिंतन मनन कर बस्तर में शांति का वातावरण स्थापित किया जाय, बयान की पूर्व में भी उक्त मंत्री के द्वारा बोधघाट परियोजना पर दबाव पूर्वक नियम विरुद्ध संविधान विधि के विरुद्ध स्थापित करने का बयान देकर जनजातियों को डराया गया है वही सीलगेर गोलीबारी घटना के बाद भी इस मंत्री के द्वारा अशांत बस्तर की हालात में भी उस क्षेत्र में 6 नए कैंप स्थापित करने की धमकी भरा बयान दे कर आन्दोलन कारी ग्रामीणों को और भड़काया गया । छत्तीसगढ़ सरकार को ढाई साल पूरे हो गए लेकिन कृषि मंत्री द्वारा बस्तर संभाग के  जिला मुख्यालय में कृषि विभाग के बैठकों का समीक्षा आज तक नहीं किया गया है यह उनकी कर्मठता को दर्शाता है यह मंत्री बोधघाट परियोजना स्थापित करने की बात करता है बोधघाट बारसूर क्षेत्र में आज तक कभी जाकर धरातल की सच्चाई को देखा तक नहीं है और वहां कैसे विकास होगा इसकी पैरवी वहां एसी रूम में बैठकर कर रहा है यह मंत्री महोदय रविन्द्र चौबे नहीं चाहते कि बस्तर में शांति कायम हो इसलिए उलुल जुलुल बयान दे रहे है, इसका मतलब यह है कि अनुसूचित क्षेत्र की शांति एवं सुरक्षा विकास की बात बिल्कुल न की जाए जो सरकार का हिडन एजेंडा है, राज्य सरकार को साफ करना चाहिए कि उक्त मंत्री महोदय के तीन बयानों का अर्थ उनका निजी है या कांग्रेस पार्टी की बयान है या फिर राज्य सरकार की बयान है जहां साफ करना होगा क्योंकि तीनों बयान उनके हिडेन एजेंडा हो सकते हैं लेकिन उनके घोषणा पत्र के वादों से तो मैच नहीं खा रहे हैं चूंकि बस्तर संभाग पुर्णत: अनुसूचित क्षेत्र है मंत्री जी के बयान से लगता है कि अनुसूचित क्षेत्रों में भी सामान्य क्षेत्र की भांति कानून व्यवहार किया जाय, मंत्री रविंद्र चौबे द्वारा जबरन संवैधानिक प्रावधानों का अतिक्रमण किया जा रहा है, राज्यपाल महोदया की यह चिंता के बाद छत्तीसगढ़ की जनजाति सलाहकार परिषद को तत्काल बैठक आयोजित कर इन विषयों को संविधान में प्रावधान के अनुसार हल करने का प्रयास करना चाहिए, मंत्री रविंद्र चौबे को मंत्रिमंडल पद से तुरंत हटाया जाना चाहिए क्या उन्हें संविधान की जानकारी नहीं है और भविष्य में अनुसूचित क्षेत्र की संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध कोई भी मंत्री का इस तरह का बयान गैर जिम्मेदाराना होता है,  ऐसे गैरजिम्मेदाराना बयान देने वाले मंत्री को तत्काल मंत्रिमंडल पद से हटाया जाना चाहिए।

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