पराली को जलाने की बजाय मशरूम उत्पादन में उपयोग करें किसान… – Channelindia News
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पराली को जलाने की बजाय मशरूम उत्पादन में उपयोग करें किसान…

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मशरूम उत्पादन तकनीक पर ट्रेनिंग देने के लिए हिसार, हरियाणा स्थित सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान द्वारा तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के तहत आने वाले इस संस्थान में प्रदेश भर के विभिन्न जिलों के प्रतिभागियों ने ट्रेनिंग लेकर मशरूम की खेती के गुर सीखे. इस मौके पर किसानों का आह्वान किया गया कि वे पराली जलाने की बजाय उसके जरिए मशरूम का उत्पादन करके अच्छी कमाई करें. इन दिनों पंजाब और हरियाणा सहित कई प्रदेशों में जमकर पराली जलाई जा रही है. जिससे न सिर्फ जमीन की उर्वरा शक्ति खराब हो रही है बल्कि पर्यावरण प्रदूषण भी हो रहा है.
कृषि वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को सफेद बटन मशरूम के अलावा दूसरी मशरूम की प्रजातियों को बढ़ावा देने के लिए भी जागरूक किया. क्योंकि हरियाणा प्रांत में कृषि अवशेषों की कोई कमी नहीं है. केवल हरियाणा में लगभग 22 मिलियन टन गेहूं और धान का फसल अवशेष पैदा होता है. किसान अगर फसल अवशेषों को जलाने की बजाय मशरूम उत्पादन में प्रयोग करें तो उनकी आमदनी में इजाफा होगा. साथ ही प्रदूषण की समस्या भी कम होगी

कृषि विविधीकरण के रूप में अपनाएं

विश्वविद्यालय द्वारा किसानों तथा बेरोजगार युवक व युवतियों को मशरूम उत्पादन को कृषि विविधीकरण के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. वैज्ञानिकों ने बताया कि ढींगरी व दूधिया खुम्बों में भी प्रोटीन, विटामिन, खनिज लवण व अमीनो एसिड इत्यादि प्रचुर मात्र में पाए जाते हैं. इन खुम्बों में भी कई तरह के औषधीय गुण मौजूद होते हैं जो शरीर में होने वाले रोगों के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं.

मशरूम का बीज उपलब्ध

एचएयू के पौध रोग विभाग की मशरूम तकनीकी प्रयोगशाला में सफेद बटन मशरूम, ढींगरी मशरूम, दूधिया मशरूम इत्यादि का बीज उपलब्ध रहता है. जिसे अपनी आवश्यकता के अनुसार खरीदा जा सकता है. संस्थान के सह निदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. अशोक कुमार गोदारा ने बताया की इस तरह के प्रशिक्षण लगातार आयोजित किए जा रहे हैं ताकि बेरोजगार युवक-युवतियों को अधिक से अधिक लाभ मिले.

स्वरोजगार के लिए अच्छा

गोदारा ने बताया कि दिनों-दिन लोगों में जागरूकता बढ़ रही है. बेरोजगार युवक-युवतियां स्वरोजगार स्थापित करना चाहते हैं. इसी कड़ी में एचएयू से प्रशिक्षण हासिल कर वे स्वरोजगार स्थापित कर स्वावलंबी बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं. उन्होंने बताया कि मशरूम एक ऐसा व्यवसाय है जिसे भूमिहीन, शिक्षित एवं अशिक्षित, युवक व युवतियां इसे स्व-रोजगार के रूप में अपना सकते हैं.

पूरे साल कर सकते हैं मशरूम उत्पादन

सारा वर्ष मशरूम की विभिन्न प्रजातियों जैसे सफेद बटन मशरूम (अक्टूबर से फरवरी), ढींगरी (मार्च से अप्रैल), दूधिया मशरूम, धान के पुवाल की मशरूम (जुलाई से अक्टूबर) को उगाकर सारा साल मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है. प्रशिक्षण के आयोजक डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि डॉ. राकेश चुघ, डॉ. निर्मल कुमार, डॉ. डी. के. शर्मा, डॉ. भूपेंद्र सिंह, डॉ. मनमोहन ने प्रशिक्षणार्थियों को मशरूम उत्पादन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी.

 

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