Home Loan से खरीदना चाहते है घर तो इन बातों का रखें ध्यान…. – Channelindia News
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Home Loan से खरीदना चाहते है घर तो इन बातों का रखें ध्यान….

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रायपुर डेस्क (चैनल इंडिया)|  Home Loan लेकर घर खरीदते समय बैंक के वकील द्वारा जांच-पड़ताल किए जाने के बावजूद स्वतंत्र तरीके से कानूनी राय अहम है। बैंक द्वारा नियुक्त वकील सिर्फ इस बात की जांच करता है कि मकान का टाइटल यानी स्वामित्व से जुड़ी जानकारी सही है या नहीं। साथ ही संपत्ति के टाइटल को लेकर किसी तरह का विवाद तो नहीं है। यहां आप फर्ज करिए कि आप किसी गंभीर बीमारी के इलाज से पहले दूसरे डॉक्टर से भी एक राय जरूर ले लेते हैं। इसी तरह संपत्ति खरीदने से पहले अपने वकील से एक बार सलाह करना काफी अच्छा रहता है क्योंकि आपको लेंडर द्वारा नियुक्त वकील की पेशेवर क्षमता के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है।वहीं, प्रोपर्टी के डेवलपमेंट और निर्माण को लेकर स्थानीय नगर निकाय और राज्य सरकार के कानून में अंतर हो सकता है। ऐसे में स्वतंत्र स्तर पर ली गई राय काफी अहम हो सकती है क्योंकि कई बार लेंडर के वकील इन बातों पर खास ध्यान नहीं देते हैं। ऐसे में आपकी प्रोपर्टी बाद में किसी तरह के पचड़े में ना पड़े, इसके लिए कुछ अतिरिक्त राशि खर्च करने लेने में कोई बुराई नहीं है। लेंडर का वकील प्रोपर्टी की मार्केटिबिलिटी और टाइटल को लेकर ही नियमों के अनुपालन की तफ्तीश करता है। लेकिन हमारे लिए घर खरीदने का मतलब सिर्फ पैसे जमा करना और पॉजेशन प्राप्त करना भर नहीं है। इसमें अन्य नियमों के अनुपालन भी शामिल होते हैं। इसके अलावा बचत का पहलू भी शामिल है। उदाहरण के लिए खरीदार को स्टांप ड्यूटी का खर्च वहन करना होता है लेकिन कई तरह की छूट की जानकारी नहीं होने पर आपको अधिक स्टांप ड्यूटी का भुगतान करना पड़ सकता है। किसी पुरानी प्रोपर्टी को खरीदते समय बिल्डिंग की आयु और इस आधार पर स्टांप शुल्क में छूट मिल सकती है कि उसमें लिफ्ट है या नहीं। कई राज्य इस तरह की छूट देते हैं। प्रोपर्टी के स्टांप ड्यूटी का मूल्यांकन अधिक होने पर लीगल कंस्लटैंट शुल्क में छूट के लिए अपील दायर कर सकते हैं। लोग आम तौर पर रियल एस्टेट एजेंट्स को प्रोपर्टी की खरीद से जुड़े दस्तावेज तैयार करने के लिए कहते हैं। वे बस पुराने दस्तावेज को ध्यान में रखते हुए बस जरूरी जानकारी में ही बदलाव करते हैं, जबकि हर मामले में स्थिति अलग होती है। केवल सक्षम और पेशेवर वकील ही समझौते से जुड़ी विभिन्न शर्तों के निहिर्ताथ को अच्छे से समझ सकता है। ऐसे में ड्राफ्टिंग और एग्रीमेंट को समझने के मद में कुछ पैसा बचाना कई बार बहुत भारी पड़ता है।

इसे भी पढ़े   जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की 16 अक्टूबर को होगी बैठक
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