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होली है प्रेम का प्रतीक दिल की बात ला सकते है जुबा तक



होली रंगों का ही असीम प्रेम मे रंगने का त्योहार है =,जिसे आप और भी खास बना सकते है,होली  ही ऐसा पर्व है जो बिना किसी खर्च के पूर्ण उत्साह और उल्लास से मनाया जा सकता है। यह पकवानों का भी पर्व है। होली प्रेम-प्रतीति का, एकता और भाई-चारे का, मानवता, सौहार्द और अपनेपन का पर्व है। होली पर सभी भेदभाव भुलाकर, गले मिल कर प्रेम बांटना चाहिए। दूसरे की भावना का ध्यान रख कर थोड़ा सा रंग लगाने से घर-परिवार और समाज में शांति और सोहार्द बना रहता है।

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होली पारस्परिक प्रेम की प्रतीक है। यही कारण है मथुरा और बरसाने की होली विश्व में विख्यात है। होली में थोड़े से गुलाल की और ढेर सारे प्या की, स्नेह की, अपनेपन की, शालीनता और मर्यादा की आवश्यकता है। होली ऊंच- नीच की खाई पाट देती है। भेद-मतभेद मिटा देती है। टूटते रिश्ते भी होली में जुड़ जाते हैं। होली का संदेश भी है कि हमें प्रेम बांटना है और प्रेम ही पाना है।

 

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