ये है दुनिया का सबसे महंगा हीरा, जिसकी कीमत का कोई अंदाजा नहीं लगा सका… – Channelindia News
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ये है दुनिया का सबसे महंगा हीरा, जिसकी कीमत का कोई अंदाजा नहीं लगा सका…

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ये तो आप जानते हैं कि हीरे काफी महंगे होते हैं यानी एक छोटा सा हीरा खरीदने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. लेकिन, अगर इन हीरों में सबसे महंगे हीरे की बात करें तो कोहिनूर का जिक्र ना हो, ऐसा नहीं हो सकता. वैसे कई रिपोर्ट्स में माना गया है कि कोहिनूर ही दुनिया का सबसे महंगा हीरा है. इसे दुनिया का सबसे बड़ा हीरा भी माना जाता है. इसलिए आपके लिए ये गर्व की बात है कि दुनिया का सबसे महंगा हीरा भारत से निकला है.
ऐसे में कहा जा सकता है कि कोहिनूर दुनिया का सबसे महंगा हीरा है. अगर आप हीरे की कीमत की बात करें तो आप भी हैरान रह जाएंगे. तो जानते हैं हीरे से जुड़ी खास बातें, जो वाकई हैरान कर देने वाली है.

कोहिनूर में क्या है खास?
कोहिनूर के ब्रिटेन में होने जैसी कई कहानियां तो आप जानते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर ये इतना कीमती क्यों है. माना जाता है कि कोहिनूर 105.6 कैरेट का हीरा है. साथ ही यह ओवल शेप में है और इसे सबसे महंगे हीरों में गिना जाता है. वैसे तो कई रिपोर्ट्स में तो इसकी रेट का अंदाजा ही नहीं लगाया गया है, जिससे आप समझ सकते हैं कि यह कितना महंगा है. इसलिए इसे बेशकीमती कहा जाता है और इसकी रेट का अंदाजा किसी ने नहीं लगाया है.

बताया जाता है कि साल 1300 में इसे भारत से निकाला गया. ब्रिटेन ने साल 1850 में इसे ले लिया था और 1852 में इसे प्रिंस अल्बर्ट ने बदलाव कर दिया था. पहले ये हीरा 186 कैरेट का था और इसे 105 कैरेट में बदलाव कर दिया गया था. इस खास तरह के हीरे को माउंटेन ऑफ लाइट और डायमंड ऑफ बाबर भी कहा जाता है. वैसे इसे मिलने को लेकर कई कहानियां हैं. कहा जाता है कि इसे गोलकुंडा के एक खान से निकाला गया था. यह हीरा 105 कैरेट (लगभग 21 ग्राम) का है जिसे विश्व में सबसे बड़े हीरे के तौर पर विरासत हासिल है.
ब्रिटेन कैसे चला गया?

कोहिनूर हीरा ब्रिटेन कैसे चला गया. अगर चला गया तो उसे वापस क्यों नहीं लाया जा रहा? भारत सरकार कोर्ट में कह चुकी है कि कोहिनूर हीरे को चूंकि महाराजा रणजीत सिंह ने ईस्ट इंडिया कंपनी को तोहफे में दे दी थी, इसलिए उपहार या गिफ्ट को कभी वापस नहीं लेते. इस हिसाब से कोहिनूर हीरा कभी लौट कर भारत नहीं आएगा.

मनहूस होने की भी है कई कहानियां
‘कूह-ए-नूर’ (फारसी जिसका हिंदा अर्थ होता है रोशनी का पर्वत) जहां भी गया, वहां विनाशलीला रची गई. देखते-देखते सबकुछ बर्बाद हो गया. कोहिनूर का अर्थ भले ही रोशनी का पर्वत हो, लेकिन इस बेशकीमती हीरे की वजह से कई राजाओं की सल्तनत तहस-नहस हो गई. राजाओं के चमकते सितारे गर्दिश में चले गए. यह बात मान्यता के आधार पर कही जाती है और इसी आधार पर कोहिनूर को श्रापित भी बताया जाता है. श्रापित होने की बात 13वीं सदी से कही चली आती है.

 

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