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संपादकीय :भूपेश बघेल पर गर्व तो किया जा सकता है…

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राजेश दुबे,समूह सम्पादक

 

कोविड-19 यानी नोवेल कोरोना, जिसकी जद में पूरा संसार है। विश्व के ताकतवर माने जाने वाले देश इस अदृश्य वायरस के सामने घुटने टेकते हुए दिखाई दे रहे हैं, पूरी मानव जाति पर इस समय जबरदस्त खतरा मंडरा रहा है। इससे बचने के लिए भांति-भांति के उपाय किए जा रहे हैं, ऐसे में हिंदुस्तान के एक राज्य छत्तीसगढ़ में जिस तरह से कोरोना से मुकाबला किया जा रहा है, वह निश्चित रूप से प्रशंसनीय है और इसके लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर गर्व किया जा सकता है। प्रदेश की ढाई करोड़ आबादी के लिए यह गौरव का विषय है कि अपने ताबड़तोड़ जनकल्याणकारी फैसलों से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी टीम के साथ इस महामारी को काफी हद तक छत्तीसगढ़ में रोकने में सफलता हासिल की है। ऐसा करके वे देश के 19 बड़े राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आगे निकल गए हैं साथ ही छत्तीसगढ़ को देश के उन सात राज्यों में शामिल कर दिया है, जहां करोना पीडि़तों की संख्या दस के अंदर सिमट गई। छत्तीसगढ़ के लिए सुखद बात यह है कि इन दस में से आठ पीडि़त स्वस्थ्य होकर घर लौट चुके हैं।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल में अद्भत संगठनात्मक क्षमता है, जिसका प्रमाण उन्होंने झीरम नरसंहार के बाद उस वक्त दिया था, जब सब तरफ से टूटकर बिखर चुकी छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस का वजूद खत्म होने की स्थिति में था। नंदकुमार पटेल की शहादत के बाद जब पार्टी आलाकमान ने भूपेश बघेल को प्रदेश कांग्रेस को समेटने की जिम्मेदारी सौंपी, तब किसी को भी यकीन नहीं था कि पांच साल बाद कुरुदडीह (पाटन) का यह किसान कांग्रेस को सत्ता में वापस ला पाएगा। अपने संघर्ष और जिद्दी स्वभाव के कारण भूपेश बघेल ने न केवल कांग्रेसजनों को संगठित किया बल्कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को बार-बार मुसीबत में डाला। नवम्बर 2018 में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस को जिस तरह का जनादेश मिला, उसकी कल्पना भी शायद किसी ने नहीं की थी।
मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने जिस तरह की कार्यशैली के साथ काम शुरू हुआ, उसको देखकर प्रदेश के मतदाताओं को यह भरोसा तो हो गया कि उन्होंने सही हाथों में प्रदेश की बागडोर सौंपी है। करीब पंद्रह महीने पुरानी सरकार के सामने जब नोवेल कोरोना के रूप में बड़ी चुनौती सामने आई तो पूरा प्रदेश एक बार फिर से आशा भरी नजरों के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तरफ देखने लगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 21 दिन के लॉक डाउन का समर्थन करके मुख्यमंत्री ने एक परिपक्वता का परिचय देते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि जब बात देश की होगी, मानवता की होगी तो वे दलगत राजनीति से आगे बढक़र सामने आएंगे। भूपेश बघेल अपनी सरकार के साथ भारत सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
समता कॉलोनी निवासी एक युवती की रिपोर्ट जैसे ही पॉजीटिव मिली, भूपेश बघेल ने पूरी सरकार को कोरोना के खिलाफ झोंक दिया। तत्काल प्रभाव से उन्होंने छत्तीसगढ़ की सभी सीमाओं को बंद कर दिया और उसके बाद एक रणनीति बनाकर उन्होंने निर्णायक लड़ाई शुरू कर दी। प्रधानमंत्री के निर्देश पर छत्तीसगढ़ में लॉक डाउन के बारह दिन गुजर चुके हैं परंतु ऐसा एक भी वाक्या सामने नहीं आया, जिसके कारण प्रदेशवासियों के शर्मिंदा होना पड़े। अपने मंत्रियों के अलावा मुख्य सचिव राजेंद्र प्रसाद मंडल तथा पुलिस महानिदेशक दुर्गेश माधव अवस्थी के साथ मिलकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ऐसी रणनीति बनाई, जिसके कारण प्रदेशवासियों को लॉक डाउन का पालन करने में कोई असुविधा नहीं हो रही है। अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में पुलिसिया बदसुलूकी की कोई गंभीर बात सामने नहीं आई, किसी गरीब को भूखे सोने की नौबत नहीं आई। जीवन को जीने के लिए हर आवश्यक सुविधा मुहैया कराई जा रही है।
राज्य की ढ़ाई करोड़ की आबादी में यदि 10 मरीज भी कोरोना संक्रमित नही हैं तो यह पीठ थपथपाने वाला कमाल है। मशहूर फिल्म निर्माता सुधीर मिश्रा ने ट्वीट करके इसकी तारीफ की. उन्होंने लिखा है कि ‘कोरोना वायरस के बारे में जागरूकता के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा अच्छा काम किया जा रहा है.’। इतना ही नहीं दक्षिण कोरिया ने भी छत्तीसगढ़ के प्रयासों की सराहना की है। दरअसल कोरोना वायरस जैसी आपदा को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहले ही भांप गए थे। वे पहले मुख्यमंत्री थे जिन्होंने यह घोषणा की कि कोरोना’ मरीजों के इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी. उसके बाद फिर दूसरे राज्यों ने भी इसे लागू किया। कोरोना का पहला मामला सामने आते ही उन्होंने सीमाओं को सील करने के निर्देश भी दिए, यही फैसला बेहद मारक साबित हुआ।
संकट के समय पर तरह-तरह की घोषणाएं करना सरकार का काम है लेकिन बहुत कम ऐसे सत्ताधीश होते हैं, जो जमीन पर उतकर इन घोषणाओं के अमल की खुद जानकारी लेते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम ऐसे सत्ताधीशों में शुमार हो चुका है क्योंकि जब उनके पास सब्जियों को महंगे दामों पर बेचे जाने की शिकायत मिली तो समय गंवाए बिना वे सब्जी मंडी पहुंच गए। वहां उन्होंने विक्रेताओं के साथ खरीददारों से भी चर्चा की और फौरन आदेश जारी कर दिया कि मंहगी सब्जी बेचने वाले दंडित होंगे। इसी प्रकार दवाइयों, मॉस्क, सेनेटाइजर, अन्न व दैनिक उपयोग की हर सामग्री की कालाबाजारी रोकने के लिए उन्होंने खुद मोर्चा सम्भाला, जिसके सुखद परिणाम सबके सामने हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मोर्चा सम्भाले रहे। अस्पताल में उपचार करा रहे कोरोना पीडि़तों के स्वस्थ्य की नियमित जानकारी लेने के अलावा उनका ध्यान उन हजारों लोगों की तरफ भी रहा, जो लॉक डाउन के दौरान छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में फंस गए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रदेश का मेहमान बताते हुए उनके रहने, खाने-पीने तथा उपचार की न केवल
व्यवस्था की अपितु उनसे मिलकर यह जाना कि जो इंतजामात सरकार ने किए हैं, उनका फायदा मिल भी रहा है अथवा नहीं। इस संक्रमण काल में मुख्यमंत्री अनाथ आश्रम में रहने वाले बच्चों तथा वृध्दाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के पास भी गए तथा उनके खान-पान, रहन-सहन तथा दवाई-पानी की व्यवस्था की अवलोकन किया।
लॉक डॉउन के दौरान घर बैठे अपने ढाई लाख से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों की भी मुख्यमंत्री ने चिंता की और यह ऐलान किया कि बिना किसी का वेतन काटे सभी के भुगतान पांच अप्रैल तक कर दिए जाएं। किसानों, मजदूरों तथा रोज कमाने-खाने वालों के लिए मुख्यमंत्री ने अपना राजकोष खोल दिया। सभी परिवारों को तीन महीने का राशन मुफ्त में देने की शुरुआत करके उन्होंने साफ कर दिया कि अपने प्रदेश में वे किसी को कम से कम भूख से तो नहीं मरने देंगे। पंचायतों में दो-दो क्विंटल राशन की व्यवस्था करा दी गई है ताकि आवश्यकता पडऩे पर उसका उपयोग किया जा सके। इसी तरह मध्याह्न भोजन के साथ पर राशन की सूखी सामग्री उपलब्ध कराकर भूपेश बघेल की सरकार ने गांव में रहने वालों को चिंता मुक्त कर दिया है।
भूपेश बघेल की अपील पर राज्य के दानदाता खुलकर सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री सहायता कोष के लिए बड़ी राशि दी जा रही है ताकि उसका उपयोग दीन-हीन व ऐसे लोगों के लिए की जा सके, जो मजबूर हैं तथा जिनके सामने जिंदगी जीने का संकट है। अनेक समाजसेवी संगठनों ने स्वस्फूर्त सामने आकर सेवाभाव से इस संकट की घड़ी में गरीबों की सेवा कर रहे हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार समाजसेवियों से अपील कर रहे हैं। वे लगातार प्रदेशवासियों से आग्रह कर रहे हैं कि अपने घरों में स्वस्थ्य व सुरक्षित रहें, उन्हें क्या चाहिए, सरकार को बताइए, सरकार उनकी जरूरतों को पूरी करेगी। इसके लिए अनेक नम्बर जारी किए गए हैं, जिनके माध्यम से वे लोगों की आवश्यकताएं सुनते हैं तथा उनकी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं।
बीते बारह-पंद्रह दिनों में सरकार की कार्यशैली को देखने के बाद यह लगता है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मन ही मन संकल्प ले चुके हैं कि कम से कम छत्तीसगढ़ में तो वे कोरोना से एक भी व्यक्ति को मरने नहीं देंगे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए वे पूरी शिद्दत के साथ उसी भूमिका में पहुंच चुके हैं, जैसे वे भाजपा शासनकाल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की भूमिका में थे। उनकी कार्यशैली व जिद्दीपन के कारण कोरोना कम से कम छत्तीसगढ़ में तो कोई प्रकोप नहीं फैला पाएगा। अगर ऐसा हुआ तो आगे चलकर भूपेश बघेल के नेतृत्व का लोहा पूरा देश मानेगा और छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ की आबादी उन पर गर्व करेगी।

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