नशा शौक से शुरू होता है पर छोड़ने के लिए आत्मविश्वास जरूरी: डॉ. दिनेश लहरी - Channelindia News
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नशा शौक से शुरू होता है पर छोड़ने के लिए आत्मविश्वास जरूरी: डॉ. दिनेश लहरी

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रायपुर | लॉकडाउन में नशे की आदत लोगों को महंगा पड़ रहा है। इस दौरान शराब, पान, गुटका व सिगरेट की दुकानें बंद हैं। कहीं-कहीं पान, गुटका व सिगरेट मिल भी रहा है तो दोगुना से अधिक कीमतों में बेचा जा रहा है। ऐसे में घर पर रहते हुए नशे की आदत से तौबा की जा सकती है। नशे की आदत छोड़ने में लॉकडाउन उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो इस दौरान शराब या पान, गुटके व सिगरेट के आदी है।

नशे की आदत को सदा के लिए छोड़ सकते है और अपनी सेहत के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी पा सकते है। जिले में लगभग 25 फीसदी से ज्यादा लोग नशे के आदी है। राज्य मानिसक स्वास्थ्य चिकित्सालय डॉ.दिनेश लहरी ने बताया कि लॉकडाउन के ऐसे समय में शराब और पान ठेलो की दुकानें भी बंद है। आवश्यक वस्तुओं में यह शामिल नहीं होने के कारण इनका परिवहन बंद है। ऐसे में अब यह आसानी से नहीं मिल रही है। ऐसे में अगर लोग नशे को ही छोड़ दें तो उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक नुकसान से बचेंगे। उन्होंने बताया कि नशा शौक से शुरू होता है और आत्मशक्ति से छोड़ा जा सकता है। समाज में ऐसे कई उदाहरण हैं। जहां लोगों ने ठान लिया और नशे की आदत को छोड़ दिया। आज वे बेहतर जीवन जी रहे हैं।
लॉकडाउन की अनुकूल परिस्थितियों का उठायें लाभ
राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय (सेंदरी)बिलासपुर के डॉ. दिनेश कुमार लहरी क्लिनिकल साइकोलॉजिस्टने बताया 22 मार्च के बाद देश में लॉकडाउन है। ऐसे समय में शराब और पान ठेलों की दुकानें भी बंद है। आवश्यक वस्तुओं में यह शामिल नहीं होने के कारण इन का परिवहन बंद है। ऐसे में अब यह आसानी से नहीं मिल रही है। वहीं लॉक डाउन के दौरान इधर -उधर भटकने पर कार्रवाई का सामना करना है। “ऐसे में अगर लोग नशे को ही छोड़ दें तो उनके स्वास्थ्य के साथ साथ आर्थिक लाभ भी होगा । इन दिनों में नशा छोड़ने वालों के लिए सबसे बेहतर मौका है,’’ डॉ लहरी का कहना है ।
डॉ.लहरी ने कहा नशा शौक से शुरु होता है और आत्मशक्ति से छोडा जा सकता है। समाज में ऐसे तमाम उदाहरण है जहॉ लोगों ने ठान लिया कि नशे की आदत को छोड़ना है तो उन्होंने छोड़ दिया । आज वह बेहतर जीवान जी रहे है ।
जो व्यक्ति नशे की आदत से पीडित है या नशे पर नियंत्रण ना कर पाना उसकी मजबूरी होता है क्योंकि ये एक बढ़ती हुई आदत है और व्यक्ति को धीरे-धीरे नशे का आदी बनाती चली जाती है। फिर एक समय ऐसा आता है जब व्यक्ति पूर्ण रूप से नशे गिरफ्त में आ जाता है। लगातार नशे की आदत पर उसकी शारीरिक और मानसिक निर्भरता बढ जाती है। वह चाह कर भी खुद को नशे से नहीं रोक सकता है । लॉकडाउन के बाद भी लोग नशा छोड़ने का निर्णय ले सकते हैं क्योंकि इतने दिन बिना नशे के उन्होंने बिता ही लिए हैं।
नशा छोड़ने के कुछ फायदे
सुखद महसूस करना।
फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार।
हार्ट अटैक के होने की संभावना में भारी कमी।
फिजूल खर्ची से बचाव ।
कैंसर होने की संभावना में भारी कमी।
ब्लड प्रेशर, हृदयगति का सामान्य होना।

RO No.- 11641/7

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