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गरीबों के आशियाने पर लगा ब्रेक, पांच महीने से अटकी हजारों अर्जियां…पढे पूरी खबर



रायपुर. गरीबों को आशियाना देने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत संचालित मोर जमीन मोर मकान योजना पर ग्रहण लग गया है। 5 महीने से एक भी हितग्राही को घर बनाने फूटी-कौड़ी नहीं मिली है। 1700 से ज्यादा आवेदन निगम मुख्यालय के रिकार्ड में डंप हैं। इन आवेदनों की डिटेल अनुमति लेने राज्य शासन को भेजी गई, लेकिन वहां से इन मकानों को बनाने की मंजूरी नहीं मिली। अब ये आवेदक जोन से लेकर निगम मुख्यालय तक चक्कर काट रहे हैं। दरअसल गरीब तबके को पक्का मकान बनाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार आर्थिक मदद करती है। इसके लिए गरीबों को जमीन की डिटेल के साथ नगर निगम दफ्तर में आवेदन करना होता है। विवरण लेने के बाद इसके आवेदन को राज्य शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाता है। वहां से अनुमोदन के बाद निगम द्वारा आवेदकों को भुगतान किया जाता है, लेकिन विगत नवंबर माह से एक भी आवेदन को राज्य शासन से मंजूरी नहीं मिली, जिससे गरीबों का पक्का बनाने का सपना फिलहाल पूरा नहीं हो पा रहा है।

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3 लाख 15 हजार की लागत, चार किस्तों में राशि मोर जमीन मोर मकान योजना के अंतर्गत उन गरीब परिवारों को, जिनका पहले से कच्चा व जर्जर मकान है, या खुद की अपनी जमीन है। उन्हें एक बेडरूम, हॉल, किचन व लेटबाथ बनाने 3 लाख 15 हजार की राशि 4 किस्तों में दी जाती है। इसमें से 1 लाख 50 हजार केंद्र से और लागत की 25 फीसदी राशि राज्य से अनुदान के रूप में हितग्राही को मिलती है। शेष राशि हितग्राही को खुद लगानी होता है। नियम के अनुसार हितग्राही की 323 स्क्वेयर फीट जमीन खुद की होनी चाहिए। 2000 पुराने प्रकरण को निपटाने पर जोर नगर निगम रायपुर के पास मोर जमीन मोर मकान योजना के तहत 2000 आवेदन पूर्व के लंबित हैं, जिस पर आधा-अधूरा काम हुआ है। ऐसे प्रकरणों को प्रमुखता से निपटाने के दिशा-निर्देश नगरीय प्रशासन विभाग को दिए गए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा इस योजना की समीक्षा बैठक के बाद पुराने चालू मकान को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने निदेश जारी हुए हैं।

इस तरह मिलती है अनुदान राशि खाली प्लाट पर मकान बनाने के लिए गड्ढा खोदने और प्लिंथ बीम तक कार्य पूरा होने पर इसके फाेटोग्राॅफ भेजने के बाद पहली किस्त मिलेगी। इसी तरह पुराना कच्चा मकान होने की स्थिति में मकान तोड़ने के बाद गड्ढा खोदने पर यह किस्त देय है। छज्जा लेबल पर हितग्राही को दूसरी किस्त का भुगतान किया जाता है। तीसरी किस्त छत ढालने के समय देय है। जबकि आखिरी किस्त मकान के प्लास्टर, पेंट कर प्रधानमंत्री आवास योजना नाम लिखकर फोटो के साथ शासन को ऑनलाइन भेजने के उपरांत दी जाती है। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग इस योजना की नोडल एजेंसी है। जबकि नगर निगम रायपुर क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है।

नए आवेदन नहीं ले रहे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मोर जमीन मोर मकान में नए आवेदन नहीं ले रहे हैं। शासन के निर्देश अनुसार पहले से निर्माणाधीन मकानों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जा रही है।

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