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ईईएचवी वायरस के चपेट में आया एक और हाथी का शावक, हुई मौत,2 साल थी उम्र

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सूरजपुर(चैनल इंडिया)|  ईईएचवी वायरस से रेस्क्यू सेंटर में दो शावकों की मौत के बाद अब एक और शावक की मौत इसी वायरस से हो गई है। बात सूरजपुर जिले के ओडग़ी ब्लॉक के ग्राम जाज की है। वायरस को भूल चुके वन विभाग के अधिकारी शावक की मौत इसी वायरस से होने की खबरों के बाद सकते में हैं। गौरतलब है 24 हाथियों का यह दल पूर्व में तमोर पिंगला अभ्यारण्य क्षेत्र में रह चुका है और करीब एक हप्ते पहले ही इस क्षेत्र में आया है। शावक की मौत की जानकारी के बाद पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में पशु चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम किया और बिरसा जांच के लिए भेज दिया है,जंगल के किनारे ही उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।

गौरतलब है कि पिछले एक हप्ते से 24 हाथियों का दल ओडग़ी के चेन्द्रा क्षेत्र में विचरण कर रहा है,उनके हमले में एक ग्रामीण की जान भी जा चुकी है और फसलों व घरों को नुकसान भी हुआ है। अब इसी दल में शामिल एक दो साल के शावक की मौत हो गई है जो ईईएचवी वायरस से होना बताया जा रहा है। दोपहर को यह जानकारी आई थी कि जाज नाम के गांव में जंगल के किनारे एक शावक का शव दिखा है और उसकी मौत दलदल में फंसने के कारण हुई है। इस बीच जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौके पर पहुंच गए थे और वे मौत का कारण दलदल में फंसना ही मान रहे थे लेकिन पशु चिकित्सक महेंद्र कुमार पांडेय ने उन्हें यह जानकारी दे सकते में ला दिया कि इस शावक की मौत का कारण भी वही वायरस है जिससे रस्क्यू सेंटर में दो शावक मर चुके हैं। मिली जानकारी के अनुसार जहां दलदल बताया जा रहा था वहां दलदल था ही नहीं और वह जगह रेतीली थी। चिकित्सकों की टीम ने जब उसका पोस्टमार्टम किया तो शरीर के अंदर ईईएचवी वायरस के ही लक्षण दिखे। पोस्टमार्टम के बाद शव को वही दफना दिया गया तथा बिरसा ले जांच के लिए भेज दिया गया। रेस्क्यू सेंटर मेंडो शावकों की मौत के बाद अब वन विभाग यह मानकर चल रहा था कि उस वायरस से कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन अब फिर जाज में हुई शावक की मौत का कारण वायरस ही बताए जाने के बाद वन विभाग के अधिकारी सकते में आ गए हैं। सबसे बड़ी बात है कि जब चिकित्सकों ने इस वायरस से होने वाले सम्भावित खतरे से आगाह किया था लेकिन अधिकारियों में इसे लेकर गम्भीरता नहीं दिखी और एक बार फिर वायरस का खतरा सबको सताने लगा है, इस बीच बाकी शावकों को सुरक्षित रखना भी चुनौती बन गई है।

कई दिनों से था भूखा,सभी लक्षण वही : पोस्टमार्टम के बाद डॉ महेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि शावक कई दिनों से बीमार था जिस कारण खाना नहीं खा पा रहा था।इसके शरीर के अंदर भी वही लक्षण थे जो रस्क्यु सेंटर में मृत दोनों शावकों में थे।शरीर के कई अंग काम करना बंद कर चुके थे,सूजन था और खून काला पड़ गया था।उन्होंने पीएम के बाद बिसरा ले लिया है जिसे लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा।

दल में हैं पांच और शावक,उन पर भी मंडरा रहा खतरा : मिली जानकारी के अनुसार 24 हाथियों के इस दल में 5 और शावक हैं,इसकी मौत वायरस से होने की खबरों के बाद अब इन शावकों पर भी खतरा मंडराने लगा है और उनकी सुरक्षा की चिंता हो गई है। क्योंकि बताया जाता है कि यह वायरस 9 साल तक के शावकों पर ही ज्यादा असर डालता है और संक्रमित होने के बाद ज्यादा समय नहीं दे पाता।

नहीं होती हाथियों के लोकेशन की जानकारी,कैसे करेंगे निगरानी और इलाज : अब सबसे बड़ा सवाल यह सामने आ रहा है कि जब वह विभाग को किसी भी हाथी के लोकेशन की जानकारी नहीं होती है तो बाकी हाथियों और शावकों की निगरानी और वायरस से संक्रमित होने की जानकारी कैसे प्राप्त करेंगे।अगर कोई बीमार दिखा भी तो उसका इलाज कैसे करँगे क्योंकि वन विभाग के पास न ऐसे कोई संसाधन हैं और नहीं टीम।पूरी स्थिति को देखा जाए तो वायरस का खतरा सभी शावकों के साथ हाथियों में भी है और उनकी जिंदगी भगवान भरोसे है।

डॉक्टरों ने बताईं सावधानियां,प्रत्येक तालाब और नदियों में डालनी पड़ेगी दवाइयां : रेस्क्यू सेंटर में वायरस से रेवा और लक्ष्मणा की मौत के बाद चिकित्सकों ने कई सावधानियां बताईं थीं जो रेसक्यू सेंटर और तमोर पिंगला में तो अपनाई जा रही हैं लेकिन बाकी जंगलों में ऐसा कुछ नहीं हुआ जबकि तमोर पिंगला से ही 24 हाथियों का यह दल इस क्षेत्र में विचरण कर रहा है।डॉ महेंद्र कुमार पांडे ने बताया कि जंगल में सभी नदी नालों,तालाबो में पोटाश व अन्य दवाइयां डालने निर्देश दिया गया है,अन्य सावधानियां भी बताईं गईं है जिनका हर हाल में पालन करना होगा,यदि लापरवाही हुई तो स्थिति गम्भीर हो सकती है क्योंकि 9 साल की उम्र तक के शावक बड़ी संख्या में हैं।

हाथी के दो साल के नन्हे शावक की मौत दलदल में फंसने से हो गई,मामला ओडग़ी ब्लॉक के ग्राम जाज का है जहां वन विभाग शावक को बचा नहीं पाया।बताया जा रहा है कि वन विभाग को उसके दलदल में फंसे होने की जानकारी ही नहीं मिल पाई और उसे बचाने रेस्क्यू नहीं कर पाया।

वन विभाग मंगलवार सुबह 7 से 9 बजे की मान रह है लेकिन जानकारों के अनुसार इतनी जल्दी हाथी हिम्मत नहीं हारते हैं,कम से कम 24 घण्टे पहले उसकी मौत का अंदाजा लगाया जा रहा है जब गड्ढे में पानी ज्यादा होगा और दलदल भी।वर्तमान में जो फ़ोटो सामने आई है उसमें दिख रहा दलदल इतना ज्यादा नहीं है कि बाकी हाथी उसे न निकाल पाते।हतही वैसे भी इतनी जल्दी अपने किसी साथी या शावक को छोड़कर भी नहीं जाते हैं और कहीं फंसने की स्थिति में निकालने का पूरा प्रयास करते हैं और जब हिम्मत हर जाते है तभी फंसे हाथी को छोड़ते हैं,मादा तो बारह घण्टे से ज्यादा अपने मृत शावक के आसपास रहती है।

जानकारों की मानें तो वन विभाग के अधिकारी मौत आज सुबह की बता यह जताने के प्रयास कर रहे हैं कि उनकी वन हाथियों पर नजर है और उनके एक एक पल की खबर रख रहे हैं।जबकि शावक के मौत के मामले में यह स्पष्ट है कि वन विभाग की नजर शावक व बाकी साथियों पर पड़ी ही नहीं वरना रेस्क्यू कर उसे बचाया जा सकता था।

रेवा और लक्ष्मणा की मौत ईईएचवी वायरस से, आई रिपोर्ट, बाकी हाथियों में नहीं मिला संक्रमण
रेस्क्यू सेंटर में पिछले महीने हुई रेवा और लक्ष्मणा की मौत के बाद मौत का कारण ईईएचवी वायरस से संक्रमित होना माना गया था और जांच के लिए सैम्पल बरेली के लैब में भेजा गया था।मिली जानकारी के अनुसार लैब की जांच में इस बात की पुष्टि हो गई है कि उनकी मौत उक्त वायरस के संक्रमण से ही हुई थी। इनके साथ सोनू, गंगा, दुर्योधन व अन्य हाथियों का ब्लड सैम्पल भी भेजा गया था और इनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है।बरहाल जांच रिपोर्ट और अब एक और शावक की मौत ने वायरस के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है,दूसरी तरफ रस्क्यु सेंटर के बाकी हाथियों में संक्रमण न मिलना राहत वाली खबर है।

 

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