तेंदूपत्ता की तुड़ाई छोड़ स्कूल पहुंचे पालक,संकल्प लिए अब बच्चों की डांट फटकार के स्थान पर प्यार से समझाएंगे

तेंदूपत्ता की तुड़ाई छोड़ स्कूल पहुंचे पालक,संकल्प लिए अब बच्चों की डांट फटकार के स्थान पर प्यार से समझाएंगे

नगरी से संवाददाता राजू पटेल की रिपोर्ट  

नगरी। कलेक्टर नम्रता गांधी के निर्देश पर जिले भर के हाई स्कूल एवम हायर सेकेंडरी के पालक तथा बच्चों के लिए तनाव प्रबंधन पर गोष्ठी सह बैठक ,सम्मेलन आयोजित किया गया। स्वामी आत्मानन्द उत्कृष्ट विद्यालय  सिंगपुर में यह कार्यक्रम कुछ हटकर हुआ। विद्यालय के शिक्षकों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु कक्षा 10 वीं एवम 12वीं की परीक्षा दे चुके बच्चे तथा पालकों से दिन में और भेंट नहीं होने की स्थिति में रात्रि में मुलाकात कर  चार मई को विद्यालय आने का निमंत्रण दिया।इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सरपंच फणीश गंगासागर एवं सचिव जयगोपाल ध्रुव का भी भरपूर सहयोग मिला । उन्होंने गांव में इस हेतु मुनादी भी कराई थी। इसके अतिरिक्त इस कार्यक्रम को और भी रोचक एवं प्रभावी बनाया तेरह ग्राम में संचालित महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं ने सफीना बानो के नेतृत्व में महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं ने तनाव प्रबंधन को समझकर कहा कि बच्चे हमारे असली धन हैं। अतः हमें बच्चों के प्रति प्यार एवं सहानुभूति पूर्वक वव्यवहार करने की जरूरत है। 


इस अवसर पर उपस्थित महिला स्वसहायता समूह की सभी महिलाओं ने  बच्चों को शारीरिक एवम मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं करने का संकल्प लिया। इस गरिमामयी  अवसर पर संस्था के प्राचार्य डॉ व्ही. पी.चन्द्रा ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से ऐसे कई सफल व्यक्तियों की चर्चा की जो अपने समय के स्कूलों में फेल हुए थे और जिन्हें विद्यालय ने बाहर का रास्ता भी दिखा दिया था। प्राचार्य ने पालक तथा बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसी कक्षा में फेल हो जाने मात्र से जिंदगी खत्म नहीं हो जाती। हर असफलता सफलता की सीढ़ी ही होती है। अतः परिणाम जो भी आये सहर्ष स्वीकार कर सदैव आगे बढ़ने की बात सोचनी चाहिए। बच्चे हमारे अनमोल धन हैं। अतः इन्हें प्यार देकर ही सहेजा जा सकता है। उन्होंने इस अवसर पर समाज की वास्तविक स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज में ज्ञान के स्थान पर कागज की डिग्री को महत्व दिए जाने के कारण आत्महत्या जैसी घृणित घटनाएं घट रही है। अब इसे रोकने की जरूरत है। शिक्षा तंत्र को मूल्यांकन प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन करने की जरूरत है।इस अवसर पर  थॉमस अलावा एडिशन, सचिन तेंदुलकर, मुरैना जिले के बेलगाँव के आईपीएस मनोज शर्मा के अतिरिक्त कई डाक्यूमेंट्री फिल्मों का न केवल प्रदर्शन किया अपितु उस पर बृहद चर्चा भी कराई गई। पी पी टी के माध्यम से लगभग पचास ऐसे सफल व्यक्तियों की जीवनी को संक्षिप्त में प्रस्तुत कर उस पर बच्चे तथा पालकों के मध्य चर्चा कराई गई जो स्कूल की दृष्टि में असफल थे।चर्चा में भाग लेते हुए भूतपूर्व सरपंच राधेलाल सिन्हा ने कहा कि वे खुद ले देकर 10वीं पास हैं लेकिन वे अपने कारोबार से पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्हें आगे नहीं पढ़ पाने का दुःख भी नहीं है। इसके पीछे उनके पिता का हाथ है जिन्होंने हर  परीक्षा परिणाम को स्वीकार कर मुझे अपनी रुचि के अनुरूप आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।कक्षा में फेल हो जाने का बाद भी सफलता के कई द्वार खुले रहते हैं ।अतः निराश होने की जरूरत नहीं है।डॉ टी आर साहू , डॉ हेमंत साहू एवम नर्स कश्यप मैडम ने इस अवसर पर बच्चों से कहा कि कभी भी क्षणिक आवेश में आकर कोई गलत कदम नहीं उठाना चाहिए बल्कि अपनी कमजोरियों को ताकत बनानी चाहिए। कमईपुर के पालक टिकेश्वर यादव ने इस अवसर पर अपने जीवन के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों के साथ सदैव दोस्ताना व्यवहार करते हैं। दीपक कंवर ने इस अवसर पर कहा कि बच्चों को डांटने फटकारने से परीक्षा का परिणाम तो बदलने वाला नहीं है। अतः प्रारम्भ से ही मेहनत करने की सीख बच्चों को दे जानी चाहिए। इस सम्मेलन में विद्यालय के समस्त शिक्षकों के साथ साथ विदेशी राम ध्रुव,कीर्तन ध्रुव,अभिषेक ज्वेल,अनिल सेन,डेमिन दीवान,तुलसी दीवान,यामिनी यादव,धनन्जय साहू तथा मुड़केरा,अंजोरा,कासर वाही, मड़वा पथरा, सिरकट्टा,बासीखाई के स्कूली बच्चे तथा पालक उपस्थित थे। पालकों में इस कार्यक्रम को लेकर  इतना उत्साह था कि उन्होंने तेंदूपत्ता की तुड़ाई छोड़कर अपनी उपस्थिति विद्यालय में दी। कार्यक्रम की सफलता पर कार्य्रकम का संचालन करने वाले शिक्षक द्वय कल्याण कौशल तथा आर के साहू ने सभी पालकों को धन्यवाद दिया।