पूर्व महिला सरपंच समेत तीन पर कोटवार ने चढ़ा दिया ट्रैक्टर

पूर्व महिला सरपंच समेत तीन  पर कोटवार ने चढ़ा दिया ट्रैक्टर

बिलासपुर (चैनल इंडिया)। पंद्रह साल से चल रहे जमीन पर कब्जा करने से रोकने पर कोटवार ने लोगों को ट्रैक्टर ही चढ़ा दिया। इसमें पूर्व महिला सरपंच समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों को बिलासपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।   तखतपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बीजा का कोटवार विरेंद्र रजक गुरुवार को बलपूर्वक आबादी जमीन पर कब्जा करने की नीयत से जोताई करा रहा था। बालका कोल गांव की पूर्व सरपंच सुनील भारती अपने परिवार के सदस्यों के साथ मौके पहुंचीं। कोटवार को ट्रैक्टर बंद कर जमीन से हटने की बात कही। कोटवार नहीं माना बल्कि गाली गलौज करते हुए ट्रैक्टर के सामने से हटने के लिए कहा। पूर्व सरपंच और उसके परिजनों ने कहा, जमीन पर उनका हक है, नहीं हटेंगे। इतने में कोटवार ने ट्रैक्टर के सामने खड़ी पूर्व महिला सरपंच और दो सदस्यों को ट्रैक्टर से कुचल दिया।   इसके बाद विरेंद्र रजक, उसके दो बेटे साहिल, सागर और एक नाबालिग भतीजे ने मिलकर उनके साथ जमकर मारपीट भी की। वीडियो में सभी आरोपी महिला और उसके लोगों से मारपीट करते नजर आ रहे हैं। बाद में गांव के लोग घायलों को इलाज के लिए तखतपुर स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने पूर्व सरपंच समेत एक अन्य महिला को बिलासपुर रेफर कर दिया। परिजनों ने उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। थाना प्रभारी हरीश तांडेकर ने बताया कि 15 साल पुराना जमीन विवाद में गांव के कोटवार ने दो महिलाओं के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ा कर घायल कर दिया। आरोपी कोटवार उसका बेटा और भतीजे सहित एक नाबालिक को हिरासत में लिया गया है। ....................... गहरा सकता है जल संकट गंगरेल में 8 फीसदी पानी बाकी (बॉटम)  धमतरी (चैनल इंडिया)। गंगरेल बांध अपने इतिहास के सबसे गंभीर जलसंकट का सामना कर रहा है। फिलहाल बांध की कुल क्षमता के मुकाबले सिर्फ  आठ फीसदी पानी बचा हुआ है। भूजल स्तर खतरनाक स्तर तक नीचे जा चुका है। अभी मानसून आने में करीब तीन हफ्ते का समय बाकी है। ऐसे में अगर मानसून के आने में थोड़ी और देर हो गई तो स्थिति भयावह हो सकती है। धमतरी स्थित गंगरेल बांध की जलभराव क्षमता कुल 32 टीएमसी है। टीएमसी का मतलब थाउजेंड मिलियन क्यूबिक फीट। इसे थोड़ा और आसान करें तो एक टीएमसी का मतलब 28 अरब 31 करोड़ लीटर होता है। अभी बांध में सिर्फ 2 टीएमसी उपयोगी जल रह गया है।   पहले लबालब भरे बांध में बोटिंग होती थी अब सूखी पथरीली जमीन नजर आ रही है। कहीं दूर में पानी दिखाई दे रहा है। जो पानी बचा हुआ है और जो खपत है उसके मुताबिक इतना पानी करीब 85 दिन ही चल पाएगा। 1978 में बने गंगरेल बांध में इस तरह का गंभीर जल संकट पहली बार देखा जा रहा है। गंगरेल बांध से ही भिलाई इस्पात को पानी की सप्लाई होती है। इसके अलावा धमतरी, रायपुर, बिरगांव नगर निगम के लाखों लोगों को भी पेयजल गंगरेल से ही मिलता है। फिलहाल गंभीर स्थिति को देखते हुए भिलाई इस्पात को पानी की सप्लाई रोकी गई है लेकिन पेयजल के लिए पानी लगातार दिया जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बांध का डेड स्टोरेज हिट हो चुका है।  बांध में जलसंकट का सबसे मुख्य कारण बीते साल कमजोर बारिश है। दूसरा बड़ा कारण भूजल स्तर का खतरनाक लेवल तक नीचे जाना है। ऐसे में 5 जिलों के 800 से ज्यादा तालाबों को गंगरेल बांध से भरना पड़ा ताकि लोगों को निस्तारी का संकट न हो। सिर्फ धमतरी जिले की बात करें तो यहां 750 हैंड पम्प सूख चुके है।