सरकार सार्वजनिक करेगी झीरम नक्सल कांड की जांच रिपोर्ट, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया ऐलान

सरकार सार्वजनिक करेगी झीरम  नक्सल कांड की जांच रिपोर्ट, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया ऐलान

जगदलपुर (चैनल इंडिया) । राज्य की विष्णुदेव सरकार ने 25 मई 2013 को हुए झीरम हमले के बाद की गई जांच का सार्वजनिक करने का फैसला किया है। झीरम नक्सल कांड की बरसी से दो दिन पहले उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार झीरम कांड की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी। शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी इस मामले को लेकर तंज कसते हुए कहा कि सबूत उनकी जेब में हैं, लेकिन वे निकाल नहीं रहे हैं, उसे निकलवाना पड़ेगा।
 झीरम नक्सल कांड 11 साल पहले 25 मई 2013 को हुआ था। सुकमा से केशलूर लौट रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर जगदलपुर से 42 किलोमीटर पहले दरभा के झीरम घाटी में नक्सलियों ने हमला कर 33 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। मरने वालों में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व मंत्री महेन्द्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार आदि कई बड़े नेता शामिल थे। हमले में घायल विद्याचरण शुक्ल की भी 18 दिनों बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस नक्सली घटना की जांच कांग्रेस की भूपेश सरकार ने जस्टिस प्रशांत मिश्रा की अध्यक्षता में गठित विशेष न्यायिक जांच आयोग से करवाई थी, जिसकी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआइए ने भी घटना की जांच की है।
 विजय शर्मा ने नक्सलवाद सहित विभिन्न विषयों पर खुलकर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के बाद जब से भाजपा सत्ता में आई है, नक्सलियों के खिलाफ  लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसके बाद भी सरकार वार्ता के लिए पूरी तरह से तैयार है। फिलहाल राजशाही जैसी स्थिति नहीं है, इसलिए बातचीत के जरिए दशकों पुरानी इस समस्या का समाधान तलाशने के प्रयास किया जा रहे हैं। पुनर्वास नीति को और भी अच्छा बनाया जाएगा।
 विजय शर्मा ने कहा कि सरकार ने प्रदेश को नक्सलवाद की काली छाया से मुक्त कराने का निर्णय लिया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए बेहतर जीवन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। हमारा प्रयास है कि अब कोई नया नक्सली न बने। उप मुख्यमंत्री  ने पिछले दिनों हुई पीडिय़ा मुठभेड़ को लेकर भी बेबाकी से बात रखी। उन्होंने साफ  किया कि मुठभेड़ में कोई संदेह जैसी स्थिति है ही नहीं। बहुत सारी सूचनाएं एकत्रित करने के बाद इस तरह के ऑपरेशन किए जाते हैं। जो लोग भी इसे फर्जी ठहरा रहे हैं वे गलत कह रहे हैं।