अन्नदाता परेशान,जिला सहकारी बैंक में भीड़ हुई बेकाबू, कर्मचारियों के छूट रहे पसीने

अन्नदाता परेशान,जिला सहकारी बैंक में भीड़ हुई बेकाबू, कर्मचारियों के छूट रहे पसीने

सक्ती से संवाददाता मोहन अग्रवाल की रिपोर्ट

सक्ती। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बिलासपुर शाखा सक्ती में किसान अपनी मेहनत की कमाई के पैसे को लेकर काफी परेशान हैं। बैंक में भीड़ बेकाबू होती जा रही है परंतु व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। किसानों का मंडी में धान बिकने के बाद अब बैंक में पैसा आ चुका है,बैंक में अपना पैसा लेने जाना किसानों के लिए मानो एक महाभारत से कम नहीं है।  किसान सुबह 5 बजे से बैंक के सामने लाइन में लग जाते हैं और बैंक का दरवाजा खुलते ही भीड़ अचानक ऐसे अंदर घुसती है मानो कि अब बस दुर्घटना होने ही वाली है, बैंक की व्यवस्था संभालने के लिए वैसे तो वहां पर एक गार्ड की व्यवस्था है परंतु एक गार्ड भारी भीड़ के सामने में बेबस ही नजर आता है। ऐसे में इस ओर किसान के हमदर्द बनने वाले ना तो कोई जन प्रतिनिधि और ना ही कोई उच्च अधिकारी ना तो संज्ञान लेते हैं और ना ही व्यवस्था को लेकर कोई उचित कदम उठाते हैं।

बता दे बैंक से पैसा निकालना इतना मुश्किल होता है कि मौके पर अगर कोई यह नजारा देखें तो वह देखता ही रह जाएगा, वैसे देखा जाए तो बैंक के कर्मचारी अपने समय पर पहुंच जाते हैं और अपना कार्य भी पूरी ईमानदारी से करते हैं परंतु भीड़ के कारण व्यवस्था इतनी बिगड़ जाती है कि इसे संभालना बड़ी मुश्किल होता है जिस किसान का कैश काउंटर में नंबर आता है और कैशियर जैसे ही किसानों के हाथ में पैसा सौंपते हैं तो भीड़ के कारण किसान के पास उसे दोबारा गिनने का भी समय नहीं होता है। वही इससे किसान को यह भी डर सताने लगता है कि उसका पैसा पूरा है कि नहीं परंतु मजबूरी बस वह उस काउंटर से अपना पैसा बिना गिने ही वहां से खिसकना सही समझता है। इस मामले को लेकर जब बैंक के प्रबंधक से बात की गई तब उनका कहना था कि इस संबंध में थाने को सूचित किया गया है। परंतु वहां एक भी पुलिस के जवान तैनात नहीं दिखे।

किस्त किस्त में मिल रहे हैं किसानों के पैसे

धान खरीदी के बाद किसानों के पास सबसे बड़ी समस्या यह है कि बैंक में एक निर्धारित राशि  किसानों को मिल रहा है जिसके कारण किसानों को कई बार बैंक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं और बार-बार भीड़ का हिस्सा बनना भी पड़ रहा है इस संबंध में किसानों का कहना है कि हमने अगर 3 लाख  का धान बेचा है तो हमें कई बार बैंक के चक्कर काटने पड़ेंगे क्योंकि बैंक में कभी 50 हज़ार तो कभी 25 हज़ार ही दिया जा रहा है। इसके कारण हमें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है क्योंकि हम लोग दूर दराज के गांव से यहां आते हैं और हमारा पूरा दिन खाली बैंक में ही निकल जाता है।

कैश काउंटर बढ़ाने की जरूरत
अगर व्यवस्था को दुरुस्त करना है तो इस पर उच्च अधिकारियों को ध्यान देना होगा और बैंक में किसानों के लिए केस काउंटर बढ़ाना पड़ेगा ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो।