श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह यज्ञ के सातवें दिन हुआ रुक्मिणी विवाह और सुदामा चरित्र कथा का वर्णन

श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह यज्ञ के सातवें दिन हुआ रुक्मिणी विवाह और सुदामा चरित्र कथा का वर्णन

जांजगीर-चांपा से संवाददाता राजेश राठौर की रिपोर्ट 

जांजगीर-चांपा। रमन नगर जांजगीर में हरिश्चंद्र राठौर के निवास में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह यज्ञ के सातवें दिन भागवताचार्य कथावाचक बुद्धेश्वर तिवारी महाराज ने उधव चरित्र, महा रासलीला व रुक्मिणी विवाह और सुदामा चरित्र कथा का वर्णन किया। कथावाचक तिवारी ने कहा कि गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरी करने का वचन दिया। अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने महारास का आयोजन किया। इसके लिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया। सभी गोपियां सज-धजकर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गईं। कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर सभी गोपियां अपनी सुध-बुध खोकर कृष्ण के पास पहुंच गईं, इसके बाद भगवान ने रास आरंभ किया। माना जाता है कि वृंदावन स्थित निधिवन ही वह स्थान है, जहां श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। यहां भगवान ने एक अद्भुत लीला दिखाई थी, जितनी गोपियां उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरूप प्रकट हो गए। सभी गोपियों को उनका कृष्ण मिल गया और दिव्य नृत्य व प्रेमानंद शुरू हुआ। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए श्री तिवारी जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया। मौके पर आयोजक मंडली की ओर से आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत कर विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गया।उसके बाद सुदामा चरित्र कथा का वर्णन किया गया।सुदामा जी का झांकी प्रस्तुत किया गया। कथा के साथ-साथ भजन संगीत भी प्रस्तुत किया गया।मंगल आरती के साथ कथा विराम हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे।