अक्षय तृतीया पर बच्चों ने की पुतरा-पुतरी की शादी,धूमधाम से मनाया गया अक्ति त्यौहार

अक्षय तृतीया पर बच्चों ने की पुतरा-पुतरी की शादी,धूमधाम से मनाया गया अक्ति त्यौहार

भानुप्रतापपुर से संवाददाता आकाश साहू की रिपोर्ट

भानुप्रतापपुर। छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्यौहार अक्ती यानि अक्षय तृतीय शुक्रवार को भानुप्रतापपुर में धूमधाम के साथ मनाया गया। अक्षय तृतीया पर शुक्रवार को नगर के डोंगरीपारा में बच्चों ने गुड्डे-गुड़ियों की शादी कर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संस्कृति को सहेजने के साथ ही बाल विवाह रोकने का संदेश दिया। इस साल बच्चों ने परंपरा के अनुसार से आमंत्रण कार्ड भी छपवाए व एक दिन पूर्व घर-घर जाकर लोगों को आमंत्रित किया था। अक्षय तृतीया पर गाजे बाजे के साथ बारात परघाया गया। जिसमे सभी बच्चे डांस करते नजर आये।

किसानों द्वारा खरीफ फसल की शुरुआत के लिए पूजा अर्चना कर धान को धरती माँ को बीज समर्पित कर खरीफ फसल की तैयारी की औपचारिक शुरुआत की। 

अंचल में गुड्डा-गुडिया (पुतरा-पुतरी) की शादी करने की परंपरा धूमधाम से निभाई गई।अक्षय तृतीया को सभी मांगलिक कार्य के लिए शुभ माना जाता है। अक्ती त्योहार की मान्यता को लेकर बताया कि छत्तीसगढ़ में किसान अपने भरण पोषण और जीवनयापन के लिए अन्न को केवल वस्तु नहीं मानते बल्कि अन्नपूर्णा माता के रूप में उसकी पूजा करते हैं। अक्ति के दिन किये जाने वाला शुभ कार्य अक्षय होता हैं। भारतीय सनातन संस्कृति में अक्षय तृतीया को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। 
शास्त्रीय मान्यता के अनुसार बताया कि इस दिन रामायण और महाभारत की कई घटनाएं हुई थी। एकमात्र अक्षय तृतीया ही ऐसी तिथि है जिसमें मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती।