9 सदस्यीय जांच दल कांग्रेस पार्टी की जांच दल,बस्तर में आक्रोश चरम पर : ठाकुर देवेंद्र नेताम – Channelindia News
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9 सदस्यीय जांच दल कांग्रेस पार्टी की जांच दल,बस्तर में आक्रोश चरम पर : ठाकुर देवेंद्र नेताम

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रायपुर(चैनल इंडिया)| सिलगेर बीजापुर  में नवीन स्थापित सीआरपीएफ केम्प का शान्तिपूर्वक विरोध करने वाले  आदिवासियों के ऊपर गोलीबारी घटना के 19 दिन बीत जाने के बाद पूरे देश भर में जनजाति समुदाय व अन्य प्रदेश के  जनप्रतिनिधियों के द्वारा राज्यपाल एवं राष्ट्रपति महोदय को संज्ञान पत्र लिखने के पश्चात तथा सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग के द्वारा संभाग के 12 विधायक एवं तीन सांसद को इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्यवाही करने  की संज्ञान पत्र देने के पश्चात राज्य सरकार हरकत में आई तथा बस्तर संभाग के एक सांसद की अध्यक्षता में 8 विधायकों की एक समिति गठित की गई है सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश महासचिव ठाकुर देवेन्द्र नेताम द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि राज्य सरकार की उदासीनता के कारण 19 दिन बाद एक कमेटी गठित की गई यह कमेटी भी मात्र सत्ता पक्ष के विधायकों के द्वारा बनाई गई है जो कि संदेह के घेरे में है यह समिति गोलीबारी करने वाले दोषी पुलिस जवानों को बचाने के लिए ही बनाई गई है यह कोई सरकारी एजेंसी जांच समिति नहीं हैं यह कांग्रेस पार्टी द्वारा बनाई गई जांच समिति है इस समिति के माध्यम से न्याय दिलाना तो दूर पीड़ितों को और उनके दुख में नमक छिड़कने के समान है इस समिति में वही जनप्रतिनिधि हैं जिनको जनजाति समुदाय इस घटना के बाद चुप्पी साधे रहने के कारण सोशल मीडिया से लेकर चौक चौराहों तक कोर्स रही है उनसे क्या उम्मीद किया जा सकता है यह सभी जानते हैं जबकि सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग द्वारा गठित जांच दल द्वारा जांच करके जांच रिपोर्ट प्रदेश की महामहिम राज्यपाल को ईमेल के द्वारा तथा 1 जुन को बस्तर कमिशनर के माध्यम से प्रस्तुत कर दिया गया है जिसमें पाया गया है कि निर्दोष जनजाति ग्रामीण किसानों के ऊपर फर्जी नक्सली का आरोप लगाकर उनकी हत्या किया गया है इस बात की पुख्ता प्रमाण समाज के जांच दल द्वारा प्राप्त कर लिया गया है दूसरी ओर आंदोलनकारी ग्रामीण आज 21वें दिन भी लगातार आंदोलन में डटे हुए हैं उसके बावजूद शासन प्रशासन उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिसके कारण वहां पर आंदोलनरत ग्रामीणों में व्यापक जनआक्रोश व्याप्त है शुरू से ही जनजातियों के संवैधानिक प्रावधानों का घोर उल्लंघन राज्य सरकारों के द्वारा किया जाता रहा है वहीं राज्य सरकार के प्रवक्ता रवींद्र चौबे कृषि मंत्री के द्वारा जांच समिति गठित करने से 4 दिन पूर्व एक बयान में बताया गया है कि उस क्षेत्र में 6 केम्प और स्थापित किए जाएंगे इस ऐलान के बाद छत्तीसगढ़ के पूरे जनजाति समुदाय में आक्रोश व्याप्त हुआ तथा 28 मई को पूरे प्रदेश के साथ ही साथ देश के अन्य हिस्सों से भी घरों में रहकर ही पोस्टर बनाकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर पूरे देश भर के जनजाति समुदाय ने विरोध प्रकट किया है

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ठाकुर देवेन्द्र नेताम ने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में आए दिन फर्जी नक्सली मुठभेड़ में निर्दोष आदिवासियों की विगत एक दशक से चल रही घटनाओं तथा  न्याय नहीं मिलने के कारण ही समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है सुरक्षा कैंप स्थापित करके आसपास के गांव के निर्दोष  आदिवासियों को प्रताड़ित किया जाता है जिसके कारण जनजाति इन सुरक्षा केम्प का विरोध करते हैं इसमें महिलाओं के साथ छेड़छाड़ अत्याचार भेड़ बकरी मुर्गी एवं अन्य चीजों का लूटपाट करना और उसका विरोध करने पर फर्जी मुकदमों में अंदर करके जेल भेज देना प्रमुख वजह हैं

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वर्तमान में सत्ताधारी दल पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार से दो कदम आगे चलकर जनजातियों के साथ पुलिसिया अत्याचार को अंजाम दे रही है जबकि यही कांग्रेस पार्टी विधानसभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र में नक्सल फर्जी मामलों में बंद जनजातियों को रिहा करने एवं अनुसूची 5 के प्रावधान पेसा एक्ट वन अधिकार कानून को अक्षरशः लागू करने की वादा करके 12 विधानसभा सीटों से सत्ता में आई है तथा पूरे प्रदेश में जनजाति समुदाय के 29 विधायक कांग्रेश को जनजाति समुदाय ने दिया लेकिन जनजाति समुदाय के साथ अब यही पार्टी धोखा कर रही है जनजाति समुदाय के विधायक अपनी निजी स्वार्थ कुर्सी बचाने के लिए अत्याचारों को देख सुनकर जानकर भी अपना मुंह बंद किए हुए हैं आने वाले विधानसभा चुनाव में इस पार्टी का सूपड़ा साफ होना तय है जनजाति  समुदाय अब यह भी जान गया है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों की करनी एक समान है कथनी अलग-अलग है इसलिए राज्य में तीसरे मोर्चे के रूप में राजनीतिक प्रभाव बढ़ा नाही एकमात्र विकल्प बच गया है। समुदाय की वास्तविक प्रतिनिधित्व इन दोनों दलों को छोड़कर ही प्राप्त किया जा सकता है 70 सालों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व का इतिहास से वर्तमान शिक्षित पीढ़ी समझ रही है क्योंकि इन जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की नकारे पन के कारण ही जनजाति समुदाय में अत्याचार शोषण चरम पर है।

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