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बालाघाट में संपन्न हुआ राष्ट्रीय साहित्य एवं पुरातत्व का 19 वा महा अनुष्ठान, 15 राज्यों से प्रतिनिधियों ने ली भागीदारी 



सक्ती|राष्ट्रीय साहित्य एवं पुरातत्व का 19 वाँ महाभव्य अनुष्ठान तीन चरणों में  बालाघाट में इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासंघ, महाराणा प्रताप मेमोरियल समिति, महाकवि कालिदास पण्डो मंच तथा वीर अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में पुण्य सलिला वैनगंगा के तट पर बसा बालाघाट चर्चित नगर जहाँ राष्ट्रीय साहित्य एवं पुरातत्व का 19 तथा प्रथम अनोखा महाभव्य अनुष्ठान सहयोगात्मक रुप से सादगी पूर्वक आयोजित हुआ,उक्त अवसर पर 15 राज्यों से प्रतिष्ठित साहित्य विद, इतिहास विद, समाज शास्त्री, अधिकारियों का स्वयं के व्यय पर आना हुआ। प्रथम चरण प्रातः 11 बजकर 9 मिनट पर प्रारंभ हुआ, जिसके मुख्य अतिथि ड़ाँ. दिनेशचन्द्र प्रसाद, कलकत्ता (पश्चिम बंगाल), अध्यक्षता डाँ.जगदीश चंद्र वर्मा गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश), विशिष्ट अतिथियों में  ड़ाँ.क्रांति खुन्टे कसडोल (छत्तीसगढ़), कुलवंत सिंह सलुजा चांपा (छत्तीसगढ़), प्रो.एम.एन.बापट, ड़ाँ. वीरेन्द्र सिंह गहरवार ‘वीर’, श्रीमती शीला सिंह राठौर, पूरन सिंह भाटिया बालाघाट  थे,  माँ सरस्वती पूजन, सरस्वती वंदना, स्वागत गीत पश्चात, पुरातत्व एवं साहित्य संगोष्ठी के विषय में  कोरोना वायरस और भारत तथा  कोरोना वायरस से बिगड़ती अर्थव्यवस्था वर्तमान सार्थक भूमिका पर गुरु चरण भाटिया, प्रो.निधि ठाकुर, अनुपमा गौतम, आदि विद्वानों द्वारा कोविड (कोरोना) के बचाव, रोकथाम, दैनंदिन जीवन यापन पर  विस्तृत जानकारी दी। संचालन निशांत सिंह बैस ने किया,द्वितीय चरण दोपहर में प्रारंभ हुआ, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा से जिसके मुख्य अतिथि कमल किशोर शर्मा, वर्धा (महाराष्ट्र), श्रीमती सलमा जमाल जबलपुर (मध्यप्रदेश) अध्यक्षता, विशिष्ट अतिथियों में ड़ाँ.श्यामा कुर्रे, भिलाई (छत्तीसगढ़), विवेक खुन्टे, रुस (अंतर्राष्ट्रीय) एल.सी.जैन, कुलदीप बिल्थरे, प्रेम प्रकाश त्रिपाठी, प्रेमलता गुप्ता, सुरजीत सिंह ठाकुर बालाघाट थे, जहाँ राष्ट्रीय,अंतर्राष्ट्रीय एवं स्थानीय कवियों द्वारा कोरोना और विभिन्न छंदों पर स्वर रचनाएँ प्रस्तुत कर रसावादन किया। संचालन हरिलाल नगपुरे, प्रमिला विजेवार ने किया,तृतीय चरण सांय काल प्रारंभ हुआ, जिसके मुख्य अतिथि अशोक सिंह सरस्वार पूर्व विधायक, अध्यक्षता रमेश रंगलानी पूर्व अध्यक्ष नगरपालिका, विशिष्ट अतिथियों में अशोक मांझी, डिप्टी कलेक्टर,  ड़ाँ.संतोष सक्सेना भूगर्भ शास्त्री, सुभाष गुप्ता, कविता गहरवार थी, जहाँ  “गंगोत्री” वार्षिक पत्रिका का 19   वाँ अंक, प्रधान सम्पादक श्रीमती कविता गहरवार थी, “यादें” त्रैमासिक सामान्य शोध अंक, सम्पादक  आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार “वीर” थे तथा अन्य पत्र-पत्रिकाओं का विमोचन हुआ, अतिथियों के उद्बोधन पश्चात, प्रारंभ हुआ, विराट अभिनन्दन समारोह जहाँ महानुभाव को  राष्ट्रीय साहित्य प्रसार विद्श्री,  राष्ट्रीय उत्कृष्ट रचना धर्मी विद्श्री, साहित्य कमल विद्श्री,  राष्ट्रीय साहित्य मार्तण्ड विद्श्री, भू-गर्भ विद्श्री, राष्ट्रीय साहित्य मित्र विद्श्री, राष्ट्रीय उत्कृष्ट अभिव्यक्ति विद्श्री,  राष्ट्रीय  उत्कृष्ट सृजन विद्श्री, राष्ट्रीय सेवा सम्मान विद्श्री,  राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मित्र विद्श्री,  राष्ट्रीय समाज सेवा विद्श्री, राष्ट्रीय साहित्य कर्म वीर विद्श्री से 15 राज्यों  से पधारे 225 साहित्य विदो, पुरातत्व विदो, इतिहास विदो, समाज शास्त्री, पत्रकार समूहों को सर्व स्व.अमीचंद अग्रवाल, हलीम खान, सुनीता मिश्रा, सुधीर शर्मा, आनंद बिल्थरे , दिनेश नंदन तिवारी, एम.एम.अली, विजय सिंह गहरवार की स्मृति में शाल, अभिनन्दन-पत्र, स्मृति चिन्हों से  सम्मानिता किया  गया। जो रात्रि 7-45 तक चला। दिवंगत साहित्य विदो के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाल कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया, कार्यक्रम को सफल बनाने नागेंद सिंह परिहार, किशोर सिंह गहरवार, जया गहरवार, मीरा गहरवार,  समीर सिंह गहरवार, कमलकिशोर राऊत, बाबूलाल गोमासे, सागर सिंह गहरवार,  ध्रुव सिंह बैस, संदीप शर्मा, उत्पान सिंह ठाकुर, संदीप सिंह गहरवार, मनोज श्रीवास्तव, मोहित चौधरी, अजय  सिंह परिहार, सुनील डोंगरे, अमरेश सिंह परिहार, सचिन सिंह गहरवार, वैभव सिंह राठौर, कृष्णा सिंह, ज्योति ठाकुर, नीता बैस, संजुषा यादव, आभा ठाकुर, शिल्पा मनीष ठाकुर, मिश्री लाल साहू, स्मृति देशमुख, शांता गौतम, श्वेता गहरवार, मनीष इनवाती, अंकित उपाध्याय, वेंकटेश गेंडाम,रुचि गहरवार, आंचल गहरवार, ईश्वरीय प्रसाद खुन्टे, नेहा खुन्टे, ममता गहरवार  आदि  का सहयोग सराहनानीय रहा। उक्त अवसर पर जगदीश चंद्र वर्मा द्वारा भगवत गीता अतिथि को भेंट किया। अंत में दिवंगत  साहित्यविदों को भावांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि तथा आभार व्यक्त आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार “वीर”  ने किया।

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