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17 करोड़ मानव दिवस के साथ देश में नंबर वन , मनरेगा में छत्तीसगढ़ ने फिर बनाया रिकॉर्ड



छत्तीसगढ़ ने बीते दो साल में कई बड़ी उपलब्धियों को हासिल किया है. देश में छत्तीसगढ़ कई क्षेत्रों में अन्य राज्यों से काफी आगे रहा, पहले स्थान पर रहा, नंबर वन रहा. वह भी उस स्थिति में जब बीते एक साल से कोरोना का संकट है. बावजूद इसके आर्थिक मोर्चे पर भी छत्तीसगढ़ की स्थिति मजबूत रही. यही वजह है कि राज्य वनोपज के संग्रहण, खरीदी-बिक्री से लेकर रिकॉर्ड धान खरीदी में अग्रणी रहा है. मनरेगा के सफल क्रियान्वयन और रोजगार के मामले में तो छत्तीसगढ़ लगातार देश में पहले स्थान को हासिल कर रहा है. एक बार फिर राज्य के हिस्से यह कामयाबी आई है. वर्ष 2020-21 में रिकॉर्ड 17 करोड़ 20 लाख मानव दिवस कार्य के साथ छत्तीसगढ़ देश में अव्वल रहा है.

छत्तीसगढ़ ने उस लक्ष्य को भी प्राप्त किया है, जो उसे केंद्र की ओर से मिला था. लक्ष्य के विरुद्ध कामयाबी हासिल करने वाला छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य है. दरअसल चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में भारत सरकार द्वारा स्वीकृत 15 करोड़ मानव दिवस रोजगार सृजन के लक्ष्य के विरूद्ध यहां अब तक 17 करोड़ 20 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन किया जा चुका है. मनरेगा लागू होने के बाद से इस वर्ष प्रदेश में सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराने का नया रिकॉर्ड स्थापित हुआ है. मनरेगा श्रमिकों को अब तक इस साल के लिए निर्धारित लक्ष्य के विरूद्ध 107 प्रतिशत से अधिक रोजगार मुहैया कराया जा चुका है, जबकि अभी वित्तीय वर्ष के पूरा होने में दो सप्ताह से अधिक का समय शेष है. प्रदेश भर में इस समय मनरेगा कार्य जोर-शोर से प्रगति पर हैं.

सबसे आगे छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ सर्वाधिक मानव दिवस कार्य करके देश के सभी राज्यों को पीछे कर दिया है. आँकड़ों के मुताबिक मनरेगा के क्रियान्वयन में 107 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्णता के साथ छत्तीसगढ़ देश में शीर्ष पर है. पश्चिम बंगाल 105 प्रतिशत, असम और बिहार 104-104 प्रतिशत तथा ओड़िशा 103 प्रतिशत कार्य पूर्णता के साथ क्रमशः दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर है। वर्ष 2006-07 में मनरेगा की शुरूआत के बाद से इस साल प्रदेश में सर्वाधिक मानव दिवस रोजगार दिया गया है. वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक पिछले पांच वर्षों में क्रमशः दस करोड़ 14 लाख, आठ करोड़ 86 लाख, 11 करोड़ 99 लाख, 13 करोड़ 86 लाख और 13 करोड़ 62 लाख मानव दिवस रोजगार जरूरतमंदों को मुहैया कराया गया है। चालू वित्तीय वर्ष में अप्रैल-2020 से फरवरी-2021 तक 2617 करोड़ 88 लाख रूपए का मजदूरी भुगतान मनरेगा श्रमिकों को किया गया है.

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दी बधाई

छत्तीसगढ़ के हिस्से आई इस कामयाबी के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पंचायत प्रतनिधियों को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 के चलते लाक-डाउन के बावजूद मनरेगा के अंतर्गत तत्परता से शुरू हुए कार्यों से ग्रामीणों को बड़ी संख्या में सीधे रोजगार मिला. मनरेगा कार्यों ने विपरीत परिस्थितियों में भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गतिशील रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. मनरेगा आयुक्त मोहम्मद कैसर अब्दुलहक तथा उनकी टीम को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि पंचायत प्रतिनिधियों की जागरूकता और मनरेगा टीम की सक्रियता से प्रदेश आगे भी मनरेगा के तहत नई उपलब्धियां हासिल करेगा.

जिलेवार आँकड़े

आइये अब को जिलेवार आँकड़े बताते हैं कि किस जिले में कितना काम मनरेगा का हुआ है. बता दें कि प्रदेश में चालू वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य के विरूद्ध रोजगार सृजन में बिलासपुर जिला सबसे आगे है. वहां लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 131 प्रतिशत से अधिक मानव दिवस काम दिया गया है.

गोरेला-पेंड्रा-मरवाही में 125 प्रतिशत
कांकेर में 119 प्रतिशत
सरगुजा में 118 प्रतिशत
जांजगीर-चांपा में 117 प्रतिशत
दुर्ग और जशपुर में 115-115 प्रतिशत
रायगढ़ में 110 प्रतिशत
बालोद में 109 प्रतिशत
दंतेवाड़ा और कोरिया में 108-108 प्रतिशत
बेमेतरा, कोंडागांव और रायपुर में 107-107 प्रतिशत
महासमुंद में 106 प्रतिशत
बलौदाबाजार-भाटापारा और कोरबा में 105-105 प्रतिशत
कबीरधाम, बीजापुर और मुंगेली में 104-104 प्रतिशत
गरियाबंद में 102 प्रतिशत
धमतरी और सुकमा में 101-101 प्रतिशत
बलरामपुर-रामानुजगंज में 100 प्रतिशत
राजनांदगांव और बस्तर में 98-98 प्रतिशत
सूरजपुर में 96 प्रतिशत तथा नारायणपुर जिले में 95 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है.

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59 लाख से अधिक श्रमिकों को मिला काम

17 करोड़ 20 लाख मानव दिवस के मनरेगा कार्य में राज्य भर के 30 लाख से अधिक परिवारों के 59 लाख 31 हजार से अधिक श्रमिकों को काम दिया गया है. वहीं पांच लाख 20 हजार 194 परिवारों को 100 दिनों से अधिक का रोजगार मुहैया कराया गया है. कोरोना संक्रमण को रोकने लागू देशव्यापी लॉक-डाउन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने वर्तमान वित्तीय वर्ष के शुरूआती महीनों में प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर मनरेगा कार्य शुरू किए गए थे। साल भर के लिए निर्धारित लेबर बजट के तत्कालीन लक्ष्य साढ़े 13 करोड़ मानव दिवस का 66 प्रतिशत लक्ष्य शुरूआती तीन महीनों में ही हासिल कर लिया गया था.

राज्य सरकार ने किया था आग्रह

गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए 2020-21 के बजट में साढ़े 13 करोड़ मानव दिवस रोजगार की स्वीकृति दी गई थी. वित्तीय वर्ष की शुरूआत में ही ग्रामीणों को व्यापक स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने और कोरोना महामारी के चलते लागू देशव्यापी लॉक-डाउन के दौर में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर मनरेगा कार्य शुरू किए गए थे. इसके चलते प्रारंभिक तीन महीनों में ही इस लक्ष्य का 66 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया था. इसे देखते हुए राज्य शासन ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए मनरेगा के तहत रोजगार सृजन का लक्ष्य साढ़े 13 करोड़ मानव दिवस से बढ़ाकर 15 करोड़ मानव दिवस करने का आग्रह किया था. मनरेगा में छत्तीसगढ़ के लगातार अच्छे कार्यों के आधार पर केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 15 करोड़ मानव दिवस रोजगार के संशोधित लक्ष्य की मंजूरी दी है. प्रदेश में चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में अब तक मनरेगा के अंतर्गत कुल 17 करोड़ 20 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन किया जा चुका है.

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भूपेश सरकार ने जो कहा, सो किया

मनरेगा के सफल क्रियान्वयन ने यह साबित कर दिया है कि भूपेश सरकार ने जो कहा, सो किया है. दरअसल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार के बनने के साथ ही यह साफ कर दिया था कि गाँव-गरीब-मजदूर-किसान ही पहली प्राथमिकता में है. गाँवों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के जितने भी काम होंगे वो किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा था कि पलायन को रोकने के लिए गाँवों में रोजगार के साथ-साथ स्व-रोजगार को पैदा किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा था कि कोरोना संकट में गाँव भी अधिक से अधिक काम मजदूरों को दिया जाएगा. मुख्यमंत्री ने अपने वादे के अनुरूप सरकारी योजनाओं का बेहतर से बेहतर क्रियान्वयन के निर्देश दिए. वे खुद भी गाँवों में जाकर कई मौके पर काम-काज को भी जमीनी स्तर पर देखते रहे. मनरेगा के कार्यों को लेकर भी वे बेहद फोकस रहे. यही सब वजह है कि परिणाम अनुकूल रहा है. सरकार ने जितनी तैयारियाँ की थी उससे कहीं अधिक सफलता मिली है. मनरेगा के क्रियान्वयन में राज्य सरकार ने साबित कर दिया है कि सरकार की नीति और नीतय दोनों बेहद साफ और स्पष्ट है. उम्मीद है हर सरकारी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन इसी तरह से होगा और लोगों को समय पर काम और दाम सम्मान के साथ प्राप्त होते रहेगा.