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सावधान : कोरोना के साथ चिकन पॉक्स और पीलिया का भी प्रकोप



रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है। कोरोना अपने रौद्र रूप में नजऱ आ रहा है। कोरोना की दूसरी लहार की रफ़्तार पहले से तीन गुना ज्यादा है। रायपुर में विभिन्न वार्डो में जहाँ कोरोना के मरीज मिल रहे हैं वहां कन्टेनमेंट ज़ोन बनाया गया है हालांकि सरकार पुरजोर कोशिश का रही है कि किसी भी हालत में इस पर काबू किया जाय। कलेक्टर और एस पी खुद अधीनस्थों के साथ सड़क पर उतर कर इसकी मोनेटरिंग कर रहे हैं और दुकान संचालकों तथा वहां के कर्मचारियों व् ग्राहकों को मास्क पहनने के लिए समझा रहे हैं । उन्होंने सख्ती दिखाते हुए मास्क नहीं पहनने वालो का चालान भी कटवाया। कोरोना फैलने के साथ ही रायपुर में पीलिया और चिकनपाक्स के केश भी दिखाई देने लगा है इस सम्बन्ध में एक डाक्टर ने बताया की लोग कोरोंना से तो परेशान थे ही अब पीलिया और चिकनपॉक्स भी परेशान कर रहा है। वैसे लोगो को घबराने की जरुरत नहीं है अगर सही ढंग से खानपान पर ध्यान दें तो इस पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि रोजाना उनके क्लिनिक में काम दस मरीज चिकनपॉक्स के भी आ रहे है मौसम बदलता नहीं कि संक्रामक रोगों से पीडित रोगियों की संख्या धड़ल्ले से बढऩे लगती है। चिकन पॉक्स, खसरा, काला जार व डायरिया का संक्रमण भी फैलने लगा है। चिकन पॉक्स को एक संक्रामक बीमारी का नाम दिया गया है। बता दें कि चिकन पॉक्स छोटी चेचक नाम से भी जानी जाती है। इस संक्रमण का यूं तो बच्चों पर ही हमला होता है लेकिन यह 1 से लेकर 10 वर्ष तक के बच्चों में ज्यादातर पायी जाता है। कई दिनों से लगातार बीमार रहने पर भी यह इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं, खान-पान में आई अनियमितता भी इस बीमारी का प्रमुख कारण होती है। तेजी से खुजली होना, लाल दाने निकल आना इस बीमारी के प्रमुख लक्षण माने जाते हैं।

चिकन पॉक्स क्यों होता है चिकन पॉक्स की बीमारी ठीक ढंग से नहीं खाने और पीने से होती है। जैसे कि दूषित भोजन या पानी का सेवन कर लेने से या फिर खुला खाद्य पदार्थ खा लेने से इस गंभीर बीमारी को दावत देने जैसा होता है। अत्यधिक ठंड या गर्म होने से भी यह बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है। हवा में मौजूद बेरीसेला वायरस ठंड में ज्यादा सक्रिय होता है जो बच्चों को खासकर प्रभावित करता है।वहीं जिन बच्चों की त्वचा ज्यादा संवेदनशील होती है, उन्हें चिकेन पॉक्स होने की संभावना भी ज्यादा होती हैं।ज्यांदा कड़े साबुन या ज्यादा देर तक नहाने से भी यह इंफेक्शन हो जाता है।ज्यादा छोटे बच्चों में मां के दूध को एकाएक छोड़कर कुछ और खाने का चीज़ खिलाने से भी यह इंफेक्शन फैल सकता है।

चिकन पॉक्स के लक्षण चिकन पॉक्स होने पर सबसे पहले बच्चों में बुखार आता है जो दो दिनों तक रहता है। फिर शरीर में छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं। छह दिन बाद यह दाने खुद ही समाप्त हो जाते हैं लेकिन ऐसे समय में पीडि़त बच्चा बहुत कमजोर हो जाता है और शरीर की प्रतिरोधी क्षमता भी कमजोर हो जाती है। इस बीमारी की शुरुआत लाल उभरे दाने से होती है। यह मुख्य रूप से चेहरे, खोपडी, रीढ और टांगों पर दिखाई देती है। इसमें तेज खुजली भी होती है।