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बलात्कार मामलों में अदालत न करें घिसी-पिटी….सुप्रीम कोर्ट



छेड़छाड़ के आरोपी को विक्टिम से राखी बंधवाने की शर्त में जमानत देने के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान देश भर के कोर्ट को सलाह दी है कि वह ऐसे मामले में अपने आदेश में रूढ़िवादी यानी घिसीपिटी ओपिनियन देने से परहेज करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों के आदेश में कहीं भी पुरुषवादी सोच या रूढ़िवादी बातें नहीं होनी चाहिए और विक्टिम महिलाओं के ड्रेस, उनके व्यवहार, उनके अतीत और उनके नैतिकता के बारे में ऑर्डर में कुछ भी नहीं लिखा होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने जेंडर संवेदनशीलता (संवेदीकरण) विषय को ट्रेनिंग का पार्ट बनाने को कहा ताकि जजों की मौलिक ट्रेनिंग में जेंडर संवेदनशीलता अनिवार्य तौर पर रहे।

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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर की अगुवाई वाली बेंच के सामने सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट अपर्णा भट्ट और अन्य 8 महिला वकीलों ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए इस मामले में तमाम निर्देश जारी किए हैं। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने छेड़छाड़ मामले में आरोपी को जमानत देते हुए शर्त लगाई थी कि वह विक्टिम से राखी बंधवाए। इस फैसले को खिलाफ को सुप्रीम कोर्ट में 9 महिला वकीलों ने चुनौती दी थी और कहा था कि ये फैसला कानून के सिद्धांत के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अटॉर्नी जनरल से सहयोग करने को कहा था।

राखी बंधवाकर एक छेड़छाड़ के आरोपी को भाई की तरह बदलने का आदेश स्वीकार्य नहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जमानत की शर्त पर राखी बंधवाने की बात रखना और छेड़छाड़ के आरोपी को भाई के तौर पर बदलने के लिए दिया गया जूडिशल आदेश पूरी तरह से अस्वीकार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस आदेश को स्वीकार नहीं कर सकते। इस तरह की शर्त सेक्शुअल अपराध की गंभीरता को कम करता है। ये नाबालिग द्वारा किया गया पाप नहीं है कि उसे सामाजिक सेवा करवा कर या राखी बांधने का आदेश देकर या गिफ्ट दिलवा कर या शादी का वादा करवा कर या माफी मंगवाकर रास्ता निकाला जाए। सेक्शुअल ऑफेंस कानून के नजर में अपराध है।
आदेश में कहीं भी पुरुषवादी सोच और रूढ़िवादी बातें नहीं होनी चाहिए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर ने कहा कि याचिका में हाई कोर्ट और निचली अदालत के जजों को निर्देश देने की गुहार लगाई गई थी वह रेप और छेड़छाड़ जैसे केस में ऐसी शर्त न लगाएं जिससे कि विक्टिम के ट्रॉमा पर विपरीत असर हो। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जमानत का कोई भी शर्त ऐसा न हो जिससे कि आरोपी और विक्टिम की मुलाकात हो। विक्टिम का प्रोटेक्शन होना चाहिए और ये सुनिश्चित होना चाहिए कि उसका और प्रताड़ना न हो।

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