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बंगाल में गांगुली को अभी ऑफर नहीं! खराब सेहत ने ‘BJP के प्लान’ पर फेरा पानी?



कोलकाता
विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति लगातार करवट बदलती दिख रही है। यहां बीते कई रोज से बीसीसीआई अध्यक्ष का नाम यहां के सियासी पटल पर छाया हुआ है। उन्हें लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह बीजेपी में शामिल हो सकते हैं और सीएम कैंडिडेट हो सकते हैं। हालांकि पश्चिम बंगाल के बीजेपी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि पार्टी ने उन्हें अभी तक ऑफर ही नहीं किया है। साथ ही विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि अगर वह पार्टी में आते हैं तो उनकी मर्जी का स्वागत किया जाएगा।

बंगाल की राजनीति में सौरभ गांगुली की चर्चा तभी से शुरू हो गई थी जब उन्हें पिछले साल बीसीसीआई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था लेकिन सौरभ ने इससे सिरे से खारिज कर दिया। पिछले दिनों जब बंगाल के गवर्नर जगदीप धनखड़ से सौरभ गांगुली ने मुलाकात की तो एक बार फिर चर्चा तेज हो गई कि क्या सौरभ गांगुली राजनीति में शामिल होने जा रहे हैं? क्या वह बीजेपी से अपनी राजनीतिक पारी शुरू करेंगे?

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बीजेपी
को बंगाल में सीएम फेस की तलाश
दरअसल 2019 लोकसभा चुनाव में बंगाल में 18 सीटें जीतने वाली बीजेपी को ममता से कड़ी टक्कर के लिए मुख्यमंत्री चेहरे की तलाश है। गांगुली के रूप में उनकी यह तलाश पूरी होती भी दिखी लेकिन बीते रोज गांगुली अस्पताल में भर्ती हुए तो डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी। यह बीजेपी के लिए एक झटके की तरह माना गया।

गवर्नर से मुलाकात पर बढ़ी अटकलें
इससे पहले 27 दिसंबर को सौरभ गांगुली ने राजभवन में गवर्नर जगदीप धनखड़ से मुलाकात की और ईडन गार्डन में उन्हें आमंत्रित किया। धनखड़ ने कहा कि उन्होंने गांगुली से कई मुद्दों पर बात की तो बीसीसीआई अध्यक्ष ने पत्रकारों से किसी तरह की अटकलें न लगाने को कहा। बंगाल के लोगों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता के चलते अगर गांगुली वाकई राजनीति में आने का फैसला करते हैं तो उस दल को चुनाव में बढ़त मिलने की संभावना जरूर है जिसमें वह शामिल होंगे।

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गांगुली को लेकर बीजेपी का बयान
बंगाल में ममता बनर्जी सरकार का राज खत्म करने के लिए बीजेपी को गांगुली जैसे चेहरे की जरूरत है जो जनता के बीच लोकप्रिय हो। कई मौकों पर बीजेपी नेता गांगुली के राजनीति में आने का संकेत दे चुके हैं। बीजेपी के चीफ दिलीप घोष ने कि गांगुली जैसे सफल शख्सियत को राजनीति में आना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सभी को साथ लाने की कोशिश करेगी।

बंगाल के लोग नहीं चाहते गांगुली को राजनीति में देखना
दूसरी ओर टीएमसी के भी गांगुली के साथ अच्छे संबंध हैं। माना जा रहा है कि टीएमसी लगातार गांगुली को राजनीति में न आने और बीजेपी की तरफ जाने से रोकने के लिए दबाव बनाने में जुटी है। बंगाल में भी यह सर्वविदित है कि कई लोग गांगुली को स्पोर्ट्स आइकन की तरह देखते हैं और चाहते हैं कि वह राजनीति में प्रवेश न करें। राजनीतिक दल खासकर टीएमसी भी इस पब्लिक सेंटिमेंट से अच्छी तरह वाकिफ है।

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गांगुली से अस्पताल मिलने पहुंचे बड़े नेता
फिर भी बंगाल की राजनीति में गांगुली कितना मायने रखते हैं, यह इसी से पता चलता है कि जब वह बीमार पड़े तो बीजेपी से लेकर टीएमसी, सीपीएम के नेता और खुद बंगाल के गवर्नर भी उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौरभ गांगुली से फोन पर बात की तो वहीं अमित शाह ने कहा कि बीजेपी सरकार गांगुली के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी।

क्या होगा अब गांगुली का फैसला?अस्पताल में गांगुली से मिलने वालों का इतना बड़ा हुजूम था कि स्पेशल सौरभ गांगुली लाउंज बनाना पड़ा, जहां उनसे मिलने आने वाले लोगों को चाय-नाश्ता सर्व किया गया। अब देखना होगा कि राजनीति में आने पर सौरभ गांगुली का फैसला क्या होगा या फिर वह बंगाल में स्पोर्ट्स आइकन ही बने रहना पसंद करेंगे।