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प्यार तो प्यार है, एक सेक्स के हुए तो क्या…….

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काम के सिलसिले में मिलना, प्यार हो जाना और कुछ समय बाद साथ-साथ रहने लगना। खर्चे मिलकर संभालना, छुट्टियों पर जाना, एक-दूसरे के माता-पिता के साथ समय गुज़ारना और एक के बीमार पड़ने पर दूसरे का अपना पूरा समय उसका ध्यान रखने में बिता देना। यह प्यार नहीं तो और क्या है? क्या यही चीज़ें हर कोई अपने जीवनसाथी में नहीं तलाशता? लेकिन इनके लिए यह सब हाथ में होने के बाद भी जैसे नहीं है। अपना रिश्ता शादी के बंधन में बांधने की क़ानूनी इजाज़त नहीं इन्हें। सिर्फ इसलिए कि वे लड़की होकर लड़की से प्यार करती हैं और भारत में सेम-सेक्स मैरिज का कोई प्रावधान नहीं।

कविता अरोड़ा 47 साल की साइकैट्रिस्ट हैं। उनकी पार्टनर हैं 36 साल की साइकॉलजिस्ट अंकिता खन्ना। गुरुग्राम की एक मल्टिस्टोरी के आठवें माले पर दोनों ने अपनी एक खूबसूरत दुनिया बनाई है। आठ साल के रिश्ते में दोनों ने जेके रोलिंग की नॉवेल सीरीज़ हैरी पॉटर को लेकर दीवानगी शेयर की है, तो एक-दूसरे की अलग पर्सनैलिटी को भी अपनाया है। कविता को लोगों से घुलना-मिलना, बातें करना जितना पसंद है, अंकिता एकांत कोने में क़िताबों के पीछे ख़ुद को उतना ही छिपा लेती हैं। कविता खाने में सैंडविच और सैलेड खोजती हैं, तो अंकिता घर के बने शुद्ध-देसी खाने की दीवानी हैं।

दूसरे की न पसंद आने वाली आदतों को भी इन्होंने बांहें खोलकर अपनाया है। जैसे अंकिता का हर समय सफाई को लेकर पर्टिकुलर रहना या कविता का दूसरों की मदद में इस हद तक चले जाना कि ख़ुद के लिए परेशानी खड़ी हो जाए। फिर भी कभी इन डिफ्रेंसेज़ को वे रिश्ते के बीच नहीं आने देतीं। उसे अपने रूटीन में ढाल चुकी हैं। इसलिए कि अलग होने के बावजूद दोनों में एक चीज़ पूरी तरह कॉमन है। एक-दूसरे के लिए बे-इंतिहा प्यार।

काम के सिलसिले में कविता और अंकिता पहली बार मिलीं 2006 में। दोनों बच्चों की एक मेंटल हेल्थ सर्विस के लिए काम कर रही थीं, जिसकी सह-संस्थापक हैं कविता। दोनों को आज भी याद है वह दिन जब छह साल साथ काम करने के बाद 2012 में अंकिता चाय का कप हाथ में लिए कविता के ऑफिस में घुसीं। कुछ साफ़ नहीं बोल पा रही थीं। दो पल सोचा और फिर बोलीं कि उनका न्यू ईयर रेज़ॉल्यूशन है कविता के साथ बेहतर वर्किंग रिलेशन बनाना।

यहां से दोनों के कामकाजी रिश्ते तो बेहतर होते ही गए, वे बेहद नज़दीक भी आ गईं। आने वाले महीनों में दोनों को एक-दूसरे की आदत लग गई। हर पल साथ बिताना अच्छा लगने लगा। वर्किंग रिलेशन कब रोमेंटिक रिश्ता बन गया, पता ही नहीं चला। फिर साथ शिफ्ट होने जैसा बड़ा फैसला लेने पर दोनों ने एक-दूसरे के परिवार को जाना और घरवालों से मुलाकात भी की। फैमिली के साथ ऑफिस और दोस्तों का भी खूब सपोर्ट मिला।

अपनों के साथ आने से दोनों खुश थीं। फिर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने LGBTQ राइट्स पर बड़ा फैसला सुनाकर गे सेक्स को क़ानूनी पहचान दी, तो सोने पर सुहागा हो गया। कविता और अंकिता को लगा कि उन्हें अब दुनिया से और कुछ नहीं चाहिए। 2018 के बाद से दोनों को कई यंग पेशेंट मिले, जिन्होंने जेंडर और सेक्शुएलिटी से जुड़े सवाल उनसे पूछे। उन्होंने कइयों की मदद की ख़ुद को समझने और अपनाने में।

अंकिता और कविता को इस बात की बेहद खुशी थी कि न केवल वे ख़ुद एक सुंदर रिश्ते को बुन रही हैं, बल्कि दूसरों को भी राइट पार्टनर ढूंढ़ने का हौसला दे रही हैं। सबकुछ बढ़िया चल ही रहा था कि 2020 के साथ आई कोरोना महामारी, जिसने लोगों को घरों में कैद करके सोचने का समय दिया। ज़िंदगी में उनके लिए क्या और कौन बेहद ज़रूरी हैं, यह अहसास कराया। इसी बीच कविता और अंकिता ने भी एक-दूसरे का अल्टीमेट सहारा बनने के लिए रिश्ते को अगले पड़ाव पर ले जाने का फैसला किया। लिव-इन पार्टनर से बढ़कर पत्नी बनने की तैयारी शुरू कर दी। स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत अपनी शादी रजिस्टर करानी की एप्लिकेशन जमा कर डाली।

इस ख़्वाब को बुनते उन्हें अभी एक हफ्ता ही हुआ था कि उनकी एप्लिकेशन रिजेक्ट हो गई। कारण मिला कि स्पेशल मैरिज ऐक्ट में सेम-सेक्स वालों की शादी का कोई ज़िक्र नहीं। उनकी एप्लिकेशन स्वीकार नहीं की जा सकती। वे यह जानती थीं कि शादी के बिना वह चाहते हुए भी एक-दूसरे को पूरी तरह सेक्योर नहीं कर सकतीं। न वे साथ में बैंक अकाउंट खोल सकती हैं, न ही मेडिकल स्कीम्स में एक-दूसरे को नॉमिनी बना सकती हैं। पार्टनर होकर भी वे ज़िंदगी के ज़रूरी पहलुओं के लिए पार्टनरशिप में नहीं आ सकतीं।

इसी के बाद से उन्होंने एक ऐसा संघर्ष शुरू किया है, जिसे अब वे पूरा कर के ही दम लेंगी। कविता और अंकिता ने अक्टूबर 2020 में दिल्ली हाई कोर्ट में सेम-सेक्स मैरिज को क़ानूनी हक दिलाने के लिए पीटिशन फाइल की। इसमें उनका साथ दे रही हैं वकील मेनका गुरुस्वामी, जिन्होंने होमोसेक्शुएलिटी को गैर-क़ानूनी बताने वाले सेक्शन 377 को हटवाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

कविता और अंकिता का यह संघर्ष अपने मुकाम तक पहुंचा तो वे ही नहीं, भारत के सभी LGBTQ कपल्स के लिए अपने रिश्ते को शादी का रूप देने का रास्ता खुलेगा। शादी सिर्फ दो लोगों ही नहीं, उनके परिवारों को साथ लाती है। साथ में देती है कई अधिकार जो उनके रिश्ते को और ठोस बनाते हैं। लड़का-लड़की के जोड़े को जहां यह सभी अधिकार बेहद आसानी से मिल जाते हैं। अंकिता-कविता और ‘उनके जैसे कपल्स’ अभी अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। उम्मीद करते हैं कि जल्द उन्हें जीत मिले और शादी के पवित्र बंधन में बंधकर वह बाकी ज़िंदगी पत्नी और पत्नी के रूप में बिता सकें।

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