कबीर पंथी माघी पुन्नी मेला बंगोली...

कबीर पंथी माघी पुन्नी मेला बंगोली...

छत्तीसगढ़ डेस्क 

रायपुर। कबीर साहब के उपदेशों से प्रभावित धनीधर्मदास साहब के विशेष आग्रह पर मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ में सद्गुरु कबीर साहेब का संवत 1520 में प्रथम आगमन हुआ। धनीधर्मदास साहेब वर्षों तक सद्गुरु कबीर साहेब के सानिध्य में ज्ञान प्राप्त करते रहे , इस दौरान संवत् 1538 में वचनवंश मुक्तामणिनाम साहब का अवतरण हुआ, इन्हें  चुरामणिनाम से भी प्रसिद्धि मिली और संवत् 1570 में मुक्तामणि उर्फ चुरामणिनाम साहेब को  एक बड़ा सत्तसंग समारोह में वंश बयालीस ( कबीर-पंथ ) की स्थापना करते हुए प्रथम वंशाचार्य के रूप में गुरूगद्दी सौंपा गया । इसी वंश परंपरा के चौथे वंशाचार्य प्रमोद गुरू बालापीर  साहेब के साथ उनके छःभाई ,उनकी मां सहित सात सौ श्रद्धालुओं की जमात संवत् 1756  में रतनपुर से रायपुर जिला बंगोली गांव आये थे। 

ग्राम बंगोली में ग्रामीण बसाहट से कुछ दूर जंगली पेड़ झंखाड़ के बीच एक सूखा तालाब था। इसी तालाब के पार में पूरे जमात के साथ तंबू तानकर डेरा डाल दिया गया।प्रमोदगुरूबालापीर साहब द्वारा पान-फूल सुपाड़ी लेकर, पूजापाठ किया और कपूर जलाकर अपने जमातियों को सूखे तालाब की खोदाई करने की आज्ञा दी। बताते हैं बहुत हल्की खोदाई के बाद जल-स्रोत फुट पड़ा और सूखा तालाब कुछ घंटों में ही स्वच्छ निर्मल जल से लबालब भर गया। जल का स्वाद भी लोगों ने खूब मीठा अमृत सा महसूस किया। यह तालाब सामान तालाब के रूप में प्रसिद्ध हुआ । इसके समान या सामान तालाब नाम के पीछे एक तर्क यह है कि यह तालाब सभी जाति-धर्म के लोग समान रूप से उपयोग करते रहे हैं। कोई भेदभाव नहीं था। इस समय में समाज में जात-पात,छुआछूत का चलन था। भिन्न-भिन्न जातियों के लिए भिन्न-भिन्न घाट हुआ करता था। दूसरा सामान तालाब नाम के पीछे एक अलग कहानी लोगों के बीच प्रचलित है। जब प्रमोद गुरुबालापीर साहेब अपने जमात के चौकन्ने घोड़ा को रायपुर के कोई हैहैवंशी राजा द्वारा बल पूर्वक छीन कर ले गया तब बड़े खिन्न मन से बंगोली छोड़कर अन्य क्षेत्र में रहने के लिए प्रस्थान करने लगे,तब घासीदास साहेब बंगोली में ही रहकर समाज सुधार का काम करते हुए कबीपंथ का प्रचार करने की अनुमति प्रमोदगुरु बालापीर साहब से ले ली। मां भी घासीदास साहब से विशेष लगाव रखतीं थीं,इसलिए घासीदास साहब के साथ रूक गई थी। इस समय तक जमात के बहुत लोग अपने -अपने पसंद और जरुरत के मुताबिक आसपास गांवों में बस गये थे। घासीदास साहेब के जात- पात,छुआछूत के खिलाफ चलाए गये अभियान से नाराज लोगों ने आसपास गांव में अफवाह फैला दिया था कि घासीदास साहब विशेष भोजन भंडारा का आयोजन किया गया है। लोग बताते हैं कि सात लोगों के लिए ही भंडार ( रसोई ) बना था। दोपहर से देर रात तक चलने वाले भंडारे में हजारों लोगों ने भोजन लिया पर भंडार भरपूर ही रहा।तब अफवाह फैलाने वालों ने ही कहाकि इस तालाब में ही सामान भरा हुआ है, तब से इस तालाब का नाम सामान तालाब प्रसिद्ध है। 

ग्राम बंगोली में सामान तालाब के अलावा गुरुबालापीर घासीदास साहेब की समाधि और शिलास्रोत कुंड भी लोगों के श्रद्धा का केन्द्र बना हुआ है। यहां प्रति वर्ष माघ शुक्ल त्रयोदशी तिथि से पूर्णिमा तक सत्तसंग समारोह का आयोजन होता है। इस वर्ष यह तिथि 3 फरवरी से 5 फरवरी 2023 को पड़ रहा है। इसमें मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र,पंजाब, उत्तरप्रदेश, बिहार,राजस्थान सहित छत्तीसगढ़ के हजारों श्रद्धालु एवं संत,महंत शामिल होते हैं। यह मेला गुरुबालापीर घासीदास साहब के प्रथम पुण्यतिथि संवत् 1771 से कबीपंथ के चौथे पंथाचार्य प्रमोदगुरु बालापीर साहेब के द्वारा प्रारंभ किया गया था। आज तक अक्षुण्ण रूप से हर वर्ष आयोजित हो रहा है। कोरोना काल में भी दो वर्ष बिना बाधा के यह मेला सफल रहा है। किसी को छिंक तक की शिकायत नहीं रही है। यहां यह उल्लेख करना जरुरी है कि 308 वर्षों से आयोजित हो रहे इस मेला के तरफ सरकारों का रवैया ऊपेक्षा का ही रहा है। एक समय में पांचवीं कक्षा के बालभारती में इस मेले की चर्चा थी। बच्चों को पढ़ाया जाता था।