खबरे अब तक

देश-विदेश

जवान के साथ पुलिस का ऐसा व्यवहार शर्मनाक….जानिए पूरा मामला



देहरादून. अपनी फेस मेकिंग को लेकर अलर्ट रहने वाली उत्तराखंड पुलिस (Uttarakhand Police) ने अपने ही साथी की मृत्यु (Death) होने पर उसका शव बिस्तर बंद में लपेटकर उसके घर भेज दिया. परिजनों पर दु़:खों का जो पहाड़ टूट था, पुलिस की इस संवेदनहीनता ने उसे और दुगना कर दिया. बागेश्वर के गरूड़ रामपुर क्षेत्र के रहने वाले कॉंस्टेबल गणेश नाथ नैनीताल में तैनाथ थे. इसी दौरान उनकी कुंभ मेले में डयूटी लग गई. कुंभ में डयूटी के दौरान गणेशनाथ रायवाला में होटल में कमरा लेकर रहता था. 28 मार्च को रायवाला में गणेश नाथ का शव कार में पड़ा मिला. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया. एम्स में पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को कुंभ मेला प्रशासन के सुर्पद कर दिया गया.

इसे भी पढ़े   दुखद खबर : कांग्रेस वरिष्ठ नेता अहमद पटेल का निधन, एक महिने पहले हुए थे कोरोना संक्रमित... मेदांता में ली आखिरी सांस

30 मार्च को जब गणेशनाथ का शव गांव गरूड़ पहुंचा, तो परिजन ये देखकर हतप्रभ रह गए कि गणेश नाथ का शव ताबूत की जगह बिस्तर बंद में लपेटकर लाया गया था. बागेश्वर निवासी देवेंद्र गोस्वामी ने बताया कि तीन दिनों तक बिस्तर बंद में पैक रहने के कारण शव इतनी बुरी तरह डिकम्पोज हो गया था. शव की हालत ऐसी थि कि परिजनों समेत कोई भी उसका अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाया. स्थानीय लोगों का कहना है कि ये बेहद शर्मनाक घटना है. मृतक गणेश नाथ के पिता और चाचा दोनों पुलिस में तैनात रहे हैं. उनकी पहले ही मौत हो चुकी है. वर्तमान में गणेश की पत्नी और भाई भी पुलिस में तैनात हैं. पुलिस की इस लापरवाही ने परिवार के दु:ख को और बढ़ा दिया. गांव वालों का कहना है कि सीमाओं से जब सैनिक के शव कई-कई दिन बाद पैतृक गांव लाए जाते हैं, तो शव सुरक्षित होता है. लेकिन, उत्तराखंड पुलिस अपने ही साथी को एक ताबूत तक उपलब्ध नहीं करा पाई. डीआईजी लॉ एंड ऑर्डर एवं पुलिस हेडक्वार्टर के प्रवक्ता नीलेश आनंद भरणे ने बिस्तर बंद में बॉडी भेजे जाने से इंकार किया है. डीआईजी भरणे का कहना है कि उत्तराखंड पुलिस सड़क किनारे पड़े शव को भी सम्मान के साथ परिजनों तक पहुंचाती है. डीआईजी का कहना है कि शव पूरे सम्मान के साथ पहुंचाया गया. इतना जरूर है कि गर्मी के कारण बॉडी डिक्मपोज हो गई हो.