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कारोबारी कर रहे नशीली दवाइयों की तस्करी….जानिए कोन-कोन है सामील



दिल्ली से लाखों की नशीली टेबलेट की तस्कर करने वाला रैकेट फूटा है। पुलिस ने खमतराई में छापा मारकर 10 हजार नशीली दवाओं का जखीरा जब्त किया। ट्रांसपोर्टर, कारोबारी और डिलीवरी ब्वॉय समेत 5 गिराह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस अफसरों के अनुसार दवाओं का स्टॉक प्रतिबंधित है। डॉक्टर की सलाह के बिना या उनकी पर्ची के बगैर एक भी टेबलेट किसी ग्राहक को नहीं दिया जा सकता। तस्करों का गिरोह 20-25 रुपए की स्ट्रीप को दो-तीन सौ में बेच रहा था।

पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद बताया कि उरला का रहने वाला प्रदुम सिंह और विनीत शुक्ला पेशे से ट्रांसपोर्टर हैं। कबीर नगर का अतुल शर्मा और युवराज शर्मा कारोबारी हैं। नरेंद्र शर्मा ड्राइवर है। मोटी कमाई के लिए आरोपी ट्रांसपोर्टर नगर और उसके आसपास टेबलेट की तस्करी कर रहे थे। एक स्ट्रीप को कई गुना ज्यादा कीमत में बेचा जा रहा था। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने जांच की है।

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पुख्ता सबूत मिलने के बाद घेरकर पकड़ा गया। अफसरों के अनुसार पुलिस को चकमा देने के लिए आरोपी बाइक में घूम-घूमकर दवाइयां बेच रहे थे। गिरोहबाजों ने 10 माह पहले दिल्ली से नशीली प्रतिबंधित दवाओं का स्टॉक मंगवाया। उसी समय से वे थोड़ा-थोड़ा स्टॉक बेच रहे हैं।

उन्होंने ड्राइवर नरेंद्र के जरिये कुछ डिलीवरी ब्वॉय नियुक्त किए। नरेंद्र उनकी मॉनीटरिंग करता था। डिलीवरी ब्वॉय ने कुछ परमानेंट ग्राहक बना लिए थे। वे उन्हीं को दवाएं सप्लाई करते थे। आरोपियों का पिछला कोई रिकार्ड नहीं है। इस वजह से उनके बारे में पुलिस को सूचना नहीं मिल सकी।

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इसी का फायदा उठाकर आरोपी चोरी-छिपे नशीली दवाएं बेचते रहे। हालांकि आरोपियों दावा है कि रायपुर की एक दवा कंपनी ने टेबलेट मंगायी थी। स्टॉक आने के बाद भी वे लेने नहीं आए। इसलिए उन लोगों ने स्टॉक बेचना शुरू किया। पुलिस केा आशंका है कि आरोपी अब तक लाखों का स्टॉक बेचकर तगड़ी कमाई कर चुके हैं।
बिरगांव में दवाई बचने वाला फंसा : इस बीच बिरगांव में नशीली टेबलेट बेचने वाले मुकेश मधुकर पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार आरोपी मुकेश शुक्रवारी बाजार के पास प्रतिबंधित टेबलेट चोरी-छिपे बेच रहा था। वह टेबलेट का नशा करने वालों को घर पर जाकर दवाइयां देता था। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उसे पकड़ा। उसके पास से भी दवा का स्टॉक मिला है।

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दिल्ली से मंगाया टेबलेट
पुलिस को अब तक जांच में पता चला है कि तस्करों का दिल्ली में तगड़ा लिंग है। इस वजह से इतनी बड़ी मात्रा में एक साथ नशीली दवाओं का स्टॉक उन्हें मिल गया। रायपुर में ज्यादातर नशीली दवाइयां ओडिशा, दिल्ली, महाराष्ट्र से यहां सप्लाई की जाती हैं। तस्कर गिरोह पुलिस से बचने के लिए पूरा स्टॉक रायपुर में न लाकर आसपास के किसी शहर में डंप करते है।